सूडान में हिंसा की कीमत चुका रहे मासूम, छह महीने में 330 बच्‍चे ड्रोन हमले का हुए श‍िकार: यूनिसेफ

सूडान में हिंसा की कीमत चुका रहे मासूम, छह महीने में 330 बच्‍चे ड्रोन हमले का हुए श‍िकार: यूनिसेफ

खार्तूम, 6 जुलाई (आईएएनएस)। साल 2026 के पहले छह महीनों में सूडान में कम से कम 330 बच्चे या तो मारे गए या घायल हुए। यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रन्स फंड (यूनिसेफ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दारफुर और कोर्डोफान राज्यों में बच्चों के हताहत होने की सबसे ज्‍यादा घटनाएं सामने आई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है, "मई 2026 से राज्य में ड्रोन हमलों और दूसरे हमलों की वजह से 35 से ज्‍यादा बच्चे प्रभावित हुए हैं। इनमें कम से कम 18 बच्चों की मौत हुई और 17 से ज्‍यादा बच्चे घायल हुए। प्रभावित बच्चों की उम्र सिर्फ दो महीने से लेकर 17 साल तक थी। रिपोर्ट के अनुसार, इन घटनाओं में करीब 60 प्रतिशत बच्चे ड्रोन हमलों का शिकार हुए। इससे साफ है कि युद्ध में ड्रोन का इस्तेमाल बच्चों और उनके परिवारों पर कितना गंभीर असर डाल रहा है।"

लगातार हो रहे ड्रोन हमलों और गोलाबारी से लोगों के घर, स्कूल, अस्पताल, पानी की व्यवस्था और बाजार जैसी आम जरूरतों की जगहों को भी नुकसान पहुंचा है। इससे राहत सामग्री पहुंचाने वाले रास्ते भी प्रभावित हुए हैं और जरूरी सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अल ओबैद और उसके आसपास के इलाकों के साथ-साथ पूरे नॉर्थ कोर्डोफान में करीब पांच लाख लोगों की जान खतरे में है। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो और भी ज्‍यादा बच्चों को मौत, चोट, बेघर होने और दूसरे गंभीर खतरों का सामना करना पड़ सकता है।

यूनिसेफ ने अल ओबैद और उसके आसपास के इलाकों की स्थिति को 'बेहद चिंताजनक' बताया है।

सूडान में यूनिसेफ के प्रतिनिधि शेल्डन येट ने कहा, "बच्चे लगातार हिंसा, बेघर होने और बुनियादी जरूरतों की कमी के एक अंतहीन चक्र में फंसे हुए हैं। कई बच्चों के लिए अब कोई भी जगह सुरक्षित नहीं बची है। वे अपने घरों में, सड़कों पर, बाजारों में और स्कूल या इलाज जैसी जरूरी सेवाएं लेने जाते समय भी मारे जा रहे हैं या घायल हो रहे हैं। बच्चों को कभी निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके जीवन, उनके अधिकारों और उनके भविष्य की रक्षा होना बेहद जरूरी है।"

यूनिसेफ ने संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि वे आम नागरिकों और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा करें, राहत एजेंसियों को सुरक्षित, तेज और बिना किसी रुकावट के जरूरतमंद लोगों तक पहुंचने दें, और बच्चों को हर तरह के नुकसान से बचाने के लिए हर संभव कदम उठाएं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 'बच्चों के सामने सिर्फ मौत या घायल होने का ही खतरा नहीं है। इस संघर्ष की वजह से उन्हें जबरन लड़ाई में शामिल किए जाने, अगवा किए जाने, यौन हिंसा झेलने और स्कूलों व अस्पतालों पर होने वाले हमलों जैसी गंभीर घटनाओं का भी सामना करना पड़ रहा है।"

--आईएएनएस

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