पेड़ उम्मीद से कम कार्बन स्टोर कर सकते हैं, फोटोसिंथेसिस और 'वुड ग्रोथ' में अंतर दिखा: अध्ययन

पेड़ उम्मीद से कम कार्बन स्टोर कर सकते हैं, फोटोसिंथेसिस और 'वुड ग्रोथ' में अंतर दिखा: अध्ययन

नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। एक नए अध्ययन में संकेत मिला है कि पेड़ जलवायु परिवर्तन को कम करने के लिए जितना कार्बन स्टोर करने में सक्षम माने जाते हैं, वास्तविकता में उनकी क्षमता उससे कम हो सकती है। शोधकर्ताओं के अनुसार, फोटोसिंथेसिस (प्रकाश संश्लेषण) हमेशा सीधे वुड ग्रोथ (लकड़ी के निर्माण) में नहीं बदलता।

यह अध्ययन अमेरिका के 137 स्थानों पर किया गया, जिसमें पाया गया कि कई क्षेत्रों में पेड़ों की वृद्धि उस समय से कई महीने पहले रुक गई, जब फोटोसिंथेसिस पूरी तरह बंद हुआ।

अध्ययन के प्रमुख लेखक और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के लैमॉन्ट-डोहर्टी अर्थ ऑब्जर्वेटरी के वैज्ञानिक मुकुंद राव ने कहा कि अधिकांश जलवायु मॉडल यह मानते हैं कि जहां फोटोसिंथेसिस होता है, वहां पेड़ तेज गति से बढ़ते हैं लेकिन यह धारणा हमेशा सही नहीं है। उनके अनुसार, “सिर्फ अधिक फोटोसिंथेसिस का मतलब वुड ग्रोथ नहीं है।”

शोध में पाया गया कि पूर्वी अमेरिका के स्थलों पर लगभग 36 प्रतिशत वार्षिक कार्बन अवशोषण उस समय के बाद हुआ जब पेड़ों की वृद्धि रुक चुकी थी। वहीं कैलिफोर्निया में यह आंकड़ा लगभग 26 प्रतिशत था।

चार स्थलों पर किए गए गहन अध्ययन में यह भी देखा गया कि लकड़ी की वृद्धि केवल उन समयों में होती है जब वातावरण अपेक्षाकृत ठंडा और कम शुष्क होता है। लेकिन वैश्विक तापमान वृद्धि के कारण अब हीटवेव और सूखे की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे ये अनुकूल परिस्थितियां कम होती जा रही हैं।

वैज्ञानिकों ने बताया कि गर्म और शुष्क परिस्थितियों में पेड़ों की वृद्धि लगभग तुरंत रुक जाती है, जबकि फोटोसिंथेसिस कुछ हद तक जारी रह सकता है। इसका मतलब है कि पेड़ कार्बन अवशोषित तो करते हैं, लेकिन वह जरूरी नहीं कि लंबे समय तक लकड़ी के रूप में संग्रहित हो।

अध्ययन में यह भी कहा गया कि वर्तमान जलवायु मॉडल, जो फोटोसिंथेसिस और वृद्धि को सीधे जोड़कर देखते हैं, भविष्य में जंगलों की कार्बन स्टोरेज क्षमता को बढ़ा-चढ़ाकर दिखा सकते हैं। इससे यह सवाल उठता है कि क्या केवल पौधारोपण जैसी रणनीतियां पर्याप्त होंगी, या फिर कार्बन हटाने के लिए तकनीकी समाधान भी जरूरी होंगे!

--आईएएनएस

केआर/