इस्लामाबाद, 17 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों के खिलाफ पाकिस्तानी प्रशासन की कार्रवाई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हो रही है। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया है कि 8 से 16 जून के बीच हुए दमन में एक महिला समेत 32 से अधिक नागरिकों की मौत हो गई।
इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (आईएचआरएफ) ने कहा कि कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी गईं, संघीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई और 100 से अधिक कार्यकर्ताओं व नेताओं को मनमाने ढंग से गिरफ्तार किया गया।
संगठन के अनुसार, बाहरी लोगों के क्षेत्र में प्रवेश पर भी प्रतिबंध लगाया गया। साथ ही पत्रकार सोहराब बरकत को पाकिस्तान के प्रिवेंशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक क्राइम्स एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया।
पाकिस्तानी प्रशासन ने 9 जून को प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) को आतंकवाद निरोधक कानूनों के तहत प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया। इसके बाद से ही क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया।
आईएचआरएफ ने कहा, "किसी नागरिक संगठन को अस्पष्ट आधारों पर आतंकवादी करार देना और साथ ही पूरे क्षेत्र को बाहरी निगरानी से दूर कर देना, संगठन की स्वतंत्रता के अधिकार का गंभीर उल्लंघन है।"
मानवाधिकार संगठन ने आरोप लगाया कि यह कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि पीओके में मानवाधिकार उल्लंघनों के एक पैटर्न का हिस्सा है। संगठन ने मई 2024 और अक्टूबर 2025 में जेएएसी के प्रदर्शनों पर हुई कार्रवाई का भी जिक्र किया, जिनमें कई लोगों की जान गई थी।
आईएचआरएफ ने पाकिस्तान से शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग तत्काल रोकने, इंटरनेट सेवाएं बहाल करने, मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा करने और जेएएसी पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की है। साथ ही इस दौरान हुई मौत की स्वतंत्र जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की गई है।
इस बीच, एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पीओके में इंटरनेट बंदी की कड़ी आलोचना की है। संगठन के अनुसार, 5 जून से लागू प्रतिबंधों के कारण क्षेत्र में सूचना का संकट पैदा हो गया है और लोगों की जरूरी सेवाओं तक पहुंच प्रभावित हुई है।
एमनेस्टी ने यह भी कहा कि क्षेत्र में आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंधों से खाद्य सामग्री और दवाओं जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे लोगों के जीवन, स्वास्थ्य सेवाओं और आवाजाही के अधिकार पर गंभीर असर पड़ा है।
संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से संचार और आवाजाही पर लगाए गए सभी प्रतिबंध तत्काल हटाने तथा क्षेत्र में निर्बाध पहुंच बहाल करने की अपील की है।