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उत्तर कोरिया ने जापानी नेताओं के यासुकुनी दौरे पर कहा, 'ये द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लाएगा'

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सोल, 24 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर कोरिया ने जापानी नेताओं और सांसदों के विवादित यासुकुनी युद्ध स्मारक दौरे और वहां धार्मिक चढ़ावे भेजने की कड़ी निंदा करते हुए इसे “नियो-मिलिटेरिज्म फ्रेंजी” (नए सैन्यवाद का उन्माद) करार दिया है। प्योंगयांग के मुताबिक रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी का दौरा द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लेकर आएगा।

योनहाप न्यूज एजेंसी ने बताया कि उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी केसीएनए में प्रकाशित एक टिप्पणी में जापानी राजनेताओं पर सैन्य महत्वाकांक्षाओं को बढ़ावा देने का आरोप लगाया गया। यह प्रतिक्रिया 15 अगस्त को जापान के द्वितीय विश्व युद्ध में आत्मसमर्पण की वर्षगांठ पर यासुकुनी श्राइन में जापानी नेताओं और सांसदों की गतिविधियों के बाद आई है।

इसमें कहा गया है कि जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की "अचानक की गई उपासना " से देश भर में "फिर से हमले का माहौल बनाने की उनकी योजना" और "विदेशों में विस्तार की अपनी पुरानी इच्छा को पूरा करने" की उनकी कोशिशें जाहिर हुईं।

केसीएनए ने कहा, "अपनी हार के मौके पर जापान की तरफ से भड़काया गया नया सैन्यवादी उन्माद इस द्वीपीय देश में तबाही का तूफान लाएगा।"

यासुकुनी श्राइन जापान के युद्ध में मारे गए करीब 24.6 लाख लोगों को सम्मान देता है। इनमें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान युद्ध अपराधों के लिए दोषी ठहराए गए 14 वर्ग-ए युद्ध अपराधी भी शामिल हैं। इसी वजह से दक्षिण कोरिया और चीन समेत जापान के पड़ोसी देश वहां जापानी नेताओं के दौरे को जापान के सैन्य अतीत को महिमामंडित करने की कोशिश के तौर पर देखते हैं।

15 अगस्त को जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची ने यासुकुनी श्राइन के लिए कुछ भेंट भेजी, लेकिन स्वयं वहां नहीं गईं। वहीं जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइज़ुमी और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने श्राइन का दौरा किया।

दक्षिण कोरिया ने भी इन दौरों पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सोल ने जापान से अपने युद्धकालीन इतिहास का सामना करने और अतीत के लिए वास्तविक पश्चाताप दिखाने की अपील की थी।

जापान अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय सुरक्षा नीति में बदलाव की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्योंगयांग पहले भी जापान के सैन्य विस्तार और सुरक्षा नीतियों को ‘नव-सैन्यवाद’ बताते हुए उसकी आलोचना करता रहा है।

--आईएएनएस

केआर/