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जापान नई डील के तहत ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट कर पाएगा अपने हाइपरसोनिक मिसाइल

Japan

कैनबरा, 18 अगस्त (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच रक्षा सहयोग को लेकर डील हुई है। ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्ल्स ने कहा है कि जापान आने वाले दशक में ऑस्ट्रेलिया की मिसाइल परीक्षण रेंज का इस्तेमाल अपने विभिन्न मिसाइल कार्यक्रमों के परीक्षण के लिए कर सकता है। इनमें जापानी हाइपरसोनिक मिसाइल भी शामिल होंगे।

मार्ल्स ने मंगलवार को कैनबरा में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी के साथ मुलाकात के बाद कहा कि दोनों देश इस दिशा में एक बेहतर और विस्तारित व्यवस्था पर बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत जापान को विभिन्न प्रकार की मिसाइल क्षमताओं के परीक्षण के लिए ऑस्ट्रेलिया की रेंज उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें जापान का हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम भी शामिल है।

जापानी रक्षामंत्री ने इसका स्वागत किया। उन्होंने कहा, "अगर जापान सेल्फ-डिफेंस फोर्स ऑस्ट्रेलिया में हाइपरसोनिक मिसाइलों जैसी स्टैंडऑफ मिसाइलों का टेस्ट लॉन्च कर पाती है, तो यह एक बहुत बड़ी घटना होगी। यही वजह है कि हम इस मकसद को पूरा करने के लिए बातचीत तेज करेंगे।"

वहीं, मार्ल्स ने कहा कि ऑस्ट्रेलिया और जापान के बीच रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच सैन्य तकनीक और क्षमताओं के क्षेत्र में सहयोग बढ़ सकता है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब जापान अपनी रक्षा क्षमताओं को तेजी से मजबूत कर रहा है। क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों और उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम के बीच टोक्यो लंबी दूरी की मिसाइलों और हाइपरसोनिक हथियारों समेत आधुनिक सैन्य प्रणालियों पर जोर दे रहा है।

ऑस्ट्रेलिया भी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपने रक्षा साझेदारों के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। जापान के साथ मिसाइल परीक्षण सुविधाओं को साझा करना दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को एक नए स्तर पर ले जा सकता है।

मार्ल्स ने यह भी बताया कि जापान से ऑस्ट्रेलिया द्वारा हासिल की जा रही पहली मोगामी श्रेणी की फ्रिगेट के इस दशक के दौरान सेवा में शामिल होने की उम्मीद है। इससे दोनों देशों के बीच नौसैनिक सहयोग भी मजबूत होगा।

ऑस्ट्रेलिया और जापान पहले से ही सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में करीबी साझेदार हैं। मिसाइल परीक्षण रेंज के इस्तेमाल को लेकर प्रस्तावित नई व्यवस्था इस साझेदारी को केवल समुद्री सुरक्षा तक सीमित रखने के बजाय मिसाइल और उन्नत हथियार तकनीक के क्षेत्र तक विस्तार दे सकती है।

--आईएएनएस

केआर/