इस्लामाबाद: पाकिस्तान की मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने शनिवार को पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी की कड़ी निंदा करते हुए इसे आम जनता पर किया गया “आर्थिक आत्मघाती हमला” करार दिया।
यह प्रतिक्रिया तब आई जब पाकिस्तान सरकार ने अगले सप्ताह के लिए पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (एचएसडी) की कीमतों में 26.77 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की। ऊर्जा मंत्रालय (पेट्रोलियम डिवीजन) की अधिसूचना के अनुसार, नई दरें शनिवार से लागू हो गई हैं।
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा कि क्षेत्रीय तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों में फिर उछाल आया है। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों और वैश्विक साझेदारों के साथ हुए समझौतों के दबाव के कारण सरकार को यह बोझ जनता पर डालना पड़ रहा है।
मानवाधिकार परिषद ने इस फैसले पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि पेट्रोल की कीमतों में बार-बार वृद्धि केवल आंकड़ों का बदलाव नहीं, बल्कि उस महंगाई के तूफान को न्योता देना है जिसने पहले ही आम आदमी की कमर तोड़ दी है।
परिषद ने कहा कि सम्मानजनक जीवन जीना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। परिवहन, दवाइयों और रोजमर्रा की जरूरी वस्तुओं की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी गरीब और मध्यम वर्ग को गरीबी रेखा से नीचे धकेलने के समान है।
एचआरसी ने कहा कि सरकार का पहला दायित्व जनता का कल्याण सुनिश्चित करना है, न कि लोगों को असहनीय बोझ तले दबाना। परिषद ने सरकार से इस “दमनकारी फैसले” की तत्काल समीक्षा करने और आम जनता को सीधी राहत देने के लिए आपात कदम उठाने की मांग की।
परिषद की चेयरपर्सन के हवाले से कहा गया कि सरकार जनता की आवाज सुने और गरीब समर्थक आर्थिक नीतियां बनाए, न कि जनविरोधी फैसले ले। उन्होंने कहा कि अभिजात वर्ग को मिलने वाली सुविधाएं कम की जाएं ताकि आम नागरिक को राहत मिल सके।
गौरतलब है कि इससे पहले इसी महीने पाकिस्तान सरकार ने ईंधन कीमतों में भारी बढ़ोतरी की थी, जिसमें पेट्रोल 43 प्रतिशत और हाई-स्पीड डीजल 55 प्रतिशत महंगा किया गया था।