लंदन, 23 जून (आईएएनएस)। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (आईएमओ) ने मंगलवार को होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 11,000 से ज्यादा नाविकों को निकालने के लिए एक योजना शुरू करने की घोषणा की।
आईएमओ के महासचिव आर्सेनियो डोमिंग्वेज ने एक बयान में कहा कि संगठन ने इस बचाव अभियान के लिए जरूरी सुरक्षा मंजूरियां हासिल कर ली हैं और सुरक्षित समुद्री रास्तों की स्थिति की भी जांच कर ली गई है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने बताया कि यह अभियान ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर के बाद शुरू किया जा रहा है। इसे ईरान, ओमान, क्षेत्र के अन्य देशों और समुद्री उद्योग के साथ मिलकर पूरा किया जाएगा।
डोमिंग्वेज ने ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि यह समुद्री सुरक्षा को फिर से मजबूत करने और आम जहाजों पर हो रहे हमलों को रोकने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कई महीनों तक चले संघर्ष के कारण हजारों नाविकों को परेशानी हुई और दुनिया भर के व्यापार पर भी असर पड़ा।
उन्होंने संघर्ष के दौरान जान गंवाने वाले 14 नाविकों को श्रद्धांजलि दी और कहा कि वैश्विक व्यापार के लिए उनकी सेवा को कभी भुलाया नहीं जाएगा।
डोमिंग्वेज ने फिर से कहा कि आईएमओ की प्राथमिकता नाविकों की सुरक्षा, समुद्री रास्तों की आजादी और दुनिया भर में व्यापार की निरंतर आवाजाही सुनिश्चित करना है।
15 जून को डोमिंग्वेज ने कहा था कि इस निकासी योजना को लागू करने में समय लगेगा, क्योंकि सभी जरूरी सुरक्षा और बचाव इंतजामों को पक्का करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आईएमओ समुद्री सुरक्षा, नाविकों की रक्षा, समुद्र में स्वतंत्र आवाजाही और वैश्विक व्यापार को जारी रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
आईएमओ के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी के अंत से 11 जून तक होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के इलाकों में जहाजों से जुड़ी 46 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 14 नाविकों की मौत हुई।
डोमिंग्वेज ने पीड़ितों के परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि लंबे समय तक अनिश्चित हालात में भी नाविकों का साहस और धैर्य सम्मान के योग्य है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र (यूएन) कार्यालय जिनेवा में ईरान के राजदूत और स्थायी प्रतिनिधि अली बहरीनी ने मंगलवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट अब व्यापारिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है और वहां किसी तरह का टोल नहीं लिया जाएगा।
बहरीनी ने कहा कि 60 दिनों के बाद स्थिति की दोबारा समीक्षा की जाएगी, जो ईरान और अमेरिका के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगी।
--आईएएनएस
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