पेरिस, 29 जून (आईएएनएस)। फ्रांस में दो हीट वेव्स ने तबाही मचा दी है। देश में भीषण गर्मी से करीब 1,000 अतिरिक्त लोगों की मौत हुई है। रविवार को ही हेल्थ एजेंसी ने बताया कि ये मौतें 24 जून से 27 जून के बीच हुईं। इस बीच फ्रांसीसी मौसम विज्ञान विभाग 'मेटियो-फ्रांस' ने राहत की खबर सुनाई और कहा कि जून के आखिरी दो दिन सुकून भरे हो सकते हैं। लेकिन अभी भी देश में गर्मी का कहर थमा नहीं है। सरकार ने जुलाई में तीसरी बड़ी हीटवेव (लू) की आशंका जताई है।
मीडिया आउटलेट द कनेक्शन ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि 6 जुलाई के बाद से देश में एक बार फिर अत्यधिक गर्मी का दौर शुरू हो सकता है, जो 14 जुलाई तक जारी रहने की संभावना है।
फ्रांस की पारिस्थितिक परिवर्तन मंत्री मोनिक बारबो ने कहा कि 6 जुलाई के बाद देश में फिर से भीषण गर्मी लौटने की आशंका ज्यादा है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब 'मेटेओ फ्रांस पहले ही इस साल सामान्य से अधिक गर्मी वाले मौसम की भविष्यवाणी कर चुकी है। मई और जून में पड़ चुकी दो बड़ी हीटवेव ने देश के कई हिस्सों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
इस बार की गर्मी ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। 24 जून को फ्रांस में जून महीने का अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया। जून के आखिर में तापमान में थोड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन यह राहत ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगी। अनुमान है कि 6 जुलाई से सहारा रेगिस्तान की ओर से फिर बेहद गर्म हवाएं फ्रांस की ओर बढ़ सकती हैं।
जुलाई के दूसरे सप्ताह तक हालात फिर हीटवेव जैसे बन सकते हैं। यदि लगातार तीन दिनों तक दिन और रात का तापमान सामान्य से लगभग 3 डिग्री सेल्सियस अधिक रहता है, तो आधिकारिक तौर पर हीटवेव की चेतावनी जारी की जा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, स्पेन के तट के पास बनने वाला ठंडी हवा का दबाव क्षेत्र और पश्चिमी यूरोप पर मजबूत उच्च दबाव प्रणाली मिलकर फिर से "हीट डोम" प्रभाव पैदा कर सकती है। इस स्थिति में गर्म हवा वातावरण में फंस जाती है और लगातार सतह पर लौटकर तापमान को और बढ़ा देती है।
द कनेक्शन ने विशेषज्ञों के हवाले से बताया कि अगर जुलाई में तीसरी बड़ी हीटवेव आती है, तो यह फ्रांस के लिए एक भयंकर स्थिति होगी। सबसे बड़ा खतरा मिट्टी के तेजी से सूखने का है, जिससे जल संकट और फसलों के नुकसान का जोखिम बढ़ जाएगा। सूखी जमीन दिन में अधिक गर्मी सोखती है और रात में भी ठंडी नहीं हो पाती। इससे गर्मी और सूखे का एक ऐसा दुष्चक्र बन जाता है, जिसमें दोनों एक-दूसरे को और गंभीर बना देते हैं।