नई दिल्ली, 6 अगस्त (आईएएनएस)। विदेश मंत्री एस जयशंकर और विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली में सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के स्थायी सचिव (नीति) ल्यूक गोह से मुलाकात की। इस दौरान भारत-सिंगापुर के बीच घनिष्ठ सहयोग और व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर चर्चा हुई।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट के माध्यम से बताया कि गरुवार को नई दिल्ली में सिंगापुर के स्थायी सचिव ल्यूक गोह से मुलाकात करके खुशी हुई। हमने भारत और सिंगापुर के बीच घनिष्ठ सहयोग पर चर्चा की, खासकर विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), प्रौद्योगिकी, खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में मौजूद नई संभावनाओं पर।
वहीं, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि नई दिल्ली में गुरुवार को विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने भी सिंगापुर के विदेश मंत्रालय के स्थायी सचिव (नीति) ल्यूक गोह से मुलाकात की।
दोनों अधिकारियों ने भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। साथ ही, क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर हाल के घटनाक्रमों पर भी अपने विचार साझा किए।
भारत और सिंगापुर ने गुरुवार को नई दिल्ली में आयोजित भारत-सिंगापुर फॉरेन ऑफिस कंसल्टेशन्स (एफओसी) के 19वें दौर के दौरान द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की।
दोनों पक्षों ने 'भारत-सिंगापुर व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के तहत तय किए गए आठ प्रमुख क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग की प्रगति की समीक्षा की। इन विषयों पर भारत-सिंगापुर मंत्रीस्तरीय गोलमेज बैठक (आईएसएमआर) के तहत आगे काम किया जाएगा।
दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और साझा चुनौतियों से निपटने के लिए 'आसियान' सहित अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मंचों पर करीबी तालमेल के महत्व को दोहराया।
सितंबर 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिंगापुर यात्रा के दौरान भारत-सिंगापुर संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया गया था।
'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के लिए रोडमैप सितंबर 2025 में सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग की भारत यात्रा के दौरान लॉन्च किया गया था। इसमें आर्थिक सहयोग, कौशल विकास, डिजिटलीकरण, स्थिरता, कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा, लोगों के बीच और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा रक्षा और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में सहयोग शामिल है।
--आईएएनएस
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