ब्रिटिश सांसदों ने पीओके में हिंसा पर जताई चिंता, तनाव तुरंत कम करने की मांग की

ब्रिटिश सांसदों ने पीओके में हिंसा पर जताई चिंता, तनाव तुरंत कम करने की मांग की

लंदन, 31 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बढ़ती अशांति को लेकर कई ब्रिटिश सांसदों ने गंभीर चिंता जताई है। इस क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सख्त कार्रवाई, आवाजाही पर पाबंदियों और संचार व्यवस्था ठप होने की खबरों के बीच आम नागरिकों के हताहत होने और घायल होने की भी खबरें आ रही हैं।

ब्रैडफोर्ड के सांसद इमरान हुसैन और ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (एपीपीजी) के चेयरमैन ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने और 50 से अधिक सांसदों ने पीओके के हालात को लेकर यूनाइटेड किंगडम (यूके) के विदेश मंत्री को पत्र लिखा है।

हुसैन ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, "कश्मीर पर एपीपीजी के चेयरमैन के तौर पर 50 से अधिक सांसदों के साथ मिलकर हमने मौजूदा हालात के बारे में विदेश मंत्री को पत्र लिखा है। हम तनाव के गंभीर रूप से बढ़ने को लेकर बहुत चिंतित हैं, खासकर हालिया खबरों को लेकर जिनमें गोलीबारी से लोगों की मौत और घायल होने की बात कही गई है।"

हुसैन ने कहा कि कई ब्रिटिश कश्मीरी उस इलाके में अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा को लेकर परेशान हैं। उन्होंने कहा, "कई ब्रिटिश कश्मीरी अपने परिवारों की सुरक्षा और भलाई को लेकर चिंतित हैं, जिससे हमारे समुदायों में काफी बेचैनी और परेशानी है।"

उन्होंने कहा, "यूके सरकार को तनाव कम करने और बातचीत के जरिए शांतिपूर्ण समाधान निकालने के लिए सभी सही कूटनीतिक तरीकों का इस्तेमाल करना चाहिए। इस बातचीत के केंद्र में कश्मीरियों के बुनियादी मानवाधिकार होने चाहिए।"

ये बातें तब सामने आईं जब गुरुवार को यूके के कई सांसदों ने पीओके में विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा की खबरों पर चिंता जताई।

सांसद जारा सुल्ताना ने एक्स पर लिखा, "कश्मीर के लोगों के साथ एकजुटता। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा घातक बल प्रयोग की खबरें और वीडियो फुटेज बेहद परेशान करने वाले हैं।"

उन्होंने आगे कहा, "खबर है कि संचार व्यवस्था ठप होने के बीच कम से कम 30 लोग मारे गए हैं और कई अन्य घायल हुए हैं। हिंसा खत्म होनी चाहिए। संचार व्यवस्था बहाल की जानी चाहिए, स्वतंत्र जांच की अनुमति दी जानी चाहिए और मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।"

यूके की एक और सांसद नादिया व्हिटोम ने कहा कि जून में शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद अधिकारियों ने सख्त संचार प्रतिबंध लागू कर दिया था। उन्होंने लिखा कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा हजारों शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी करने और इस सप्ताह कम से कम 30 लोगों की हत्या करने की भयावह खबरें सामने आई हैं।

व्हिटोम ने पाकिस्तानी अधिकारियों पर दबाव बनाने की मांग की ताकि नाकाबंदी खत्म की जा सके और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा रोकी जा सके।

इसके अलावा, ब्रिटिश लेबर पार्टी के सांसद लियाम बर्न ने कहा कि पीओके में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ गोलीबारी की खबरें 'बेहद चिंताजनक' हैं।

पीओके में कम्युनिकेशन ब्लैकआउट और मानवाधिकारों के उल्लंघन को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य' बताते हुए बर्न ने कहा कि कश्मीर पर 'ऑल पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप' (यूके संसद का सभी पार्टियों का एक समूह) ने दो मांगें रखी हैं।

ब्रिटिश सांसद ने कहा, "पहली मांग यह है कि लंदन में पाकिस्तान के हाई कमीशन के साथ तुरंत बातचीत की जाए और कहा जाए कि यह सब बंद होना चाहिए। दूसरी मांग यह है कि हम अपने विदेश मंत्रालय के मंत्रियों से भी मिलें, ताकि यह पक्का किया जा सके कि वे पाकिस्तान सरकार के सामने सबसे ऊंचे स्तर पर अपनी बात रख रहे हैं। असल में, जरूरत इस बात की है कि बरसों पहले यूएन के प्रस्तावों में किए गए लंबे समय के वादों का सम्मान किया जाए, लेकिन अभी के लिए हमें हिंसा को रोकने की जरूरत है।"

--आईएएनएस

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