नई दिल्ली, 11 सितंबर (आईएएनएस)। भारत में आयोजित हो रहे 'ब्रिक्स समिट- 2026' को लेकर वैश्विक स्तर पर हलचल तेज है। जहां एक्सपर्ट्स इसे भारत के लिए गर्व का क्षण और 'वसुधैव कुटुंबकम' का विस्तार बता रहे हैं, वहीं रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के भारत पहुंचने से रक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर बड़ी उम्मीदें जगी हैं। इसी बीच कनाडा ने भारत को क्रिटिकल मिनरल्स के लिए भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के तौर पर समर्थन देने और 'सुरक्षा द्वीप' बनने की बात कही है।
रेवेल एनर्जी के मैनेजिंग डायरेक्टर और फाउंडर, कर्नल (रिटायर्ड) रोहित देव ने कहा, "ब्रिक्स 2026 की मेजबानी हम कर रहे हैं और ये गर्व की बात है। इस दौर में भारत किसी के प्रभाव में नहीं है। यह पहले हो सकता था, लेकिन अब नहीं। लोग हमसे जुड़ें, जो 'वसुधैव कुटुंबकम' से मेल खाता है।"
उन्होंने कहा कि रक्षा, बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी और ऊर्जा जैसे सभी अहम क्षेत्र इस साल की ब्रिक्स थीम में शामिल हैं। इस साल की थीम है, 'लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण' जो विकास के लिए बेहद जरूरी है। भारत की खासियत यह है कि वह रूस और अमेरिका दोनों के साथ दो प्लस दो रणनीतिक साझेदारी रखता है, उस पर किसी तरह की कोई प्रतिबंध नहीं है। यह ब्रिक्स सम्मेलन दुनिया की करीब 50 फीसदी आबादी का प्रतिनिधित्व करता है और इसमें लगातार नए देश जुड़ रहे हैं। यह समूह वैश्विक जीडीपी में 40 फीसदी की हिस्सेदारी रखता है।
भारत-रूस रक्षा संबंधों पर कर्नल (रिटायर्ड) रोहित देव ने कहा कि ब्रिक्स में सबसे पहले पहुंचने का फायदा किसके पास है? राष्ट्रपति पुतिन के पास, जो गुरुवार की रात ही भारत पहुंच गए। जितने भी एमओयू साइन हुए हैं, चाहे वे रक्षा क्षेत्र के ही क्यों न हों, वे किसी प्रतिबंध के दायरे में नहीं आते और पूरी तरह से भारत के राष्ट्रीय हित में हैं। कई दोहरे इस्तेमाल वाली तकनीकें हैं, जिनका रक्षा क्षेत्र में भी इस्तेमाल होता है। इंजन बनाए जाएंगे और हमारी नागरिक उड्डयन से जुड़ी पहल भी उतनी ही कारगर है, फिर चाहे हम एसयू-57 आयात ही क्यों न करें।
कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने कहा, "मैं भारत की हर सफलता की कामना करता हूं। मुझे यकीन है कि यह एक बड़ा और जटिल सम्मेलन होने वाला है। जहां तक क्रिटिकल मिनरल्स की बात है, हम भारत के लिए एक भरोसेमंद और बड़े आपूर्तिकर्ता के तौर पर खुद को स्थापित करना चाहते हैं, ताकि भारत के ग्रीन ट्रांजिशन, सेमीकंडक्टर विकास और सभी उद्योगों के लिए जरूरी क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति की जा सके। हमारे पास संसाधन हैं, तकनीक है और इसे करने की जानकारी भी है। पहले हमारे बीच इस तरह का संबंध कभी नहीं रहा, लेकिन ऐसी दुनिया में जहां व्यापार और राजनीतिक व्यवस्थाओं में इतनी कठिनाइयां हैं, असुरक्षा है, हम भारत के लिए सुरक्षा द्वीप जैसा बनना चाहते हैं।"
भारतीय अर्थव्यवस्था पर कनाडा के उच्चायुक्त क्रिस्टोफर कूटर ने कहा, "आप दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और आपने पश्चिम एशिया में युद्ध के बावजूद अपनी मजबूती साबित की है। मैं कहूंगा कि हमारी तरफ भी हाल में कुछ परेशानियां रही हैं। हम भी काफी मजबूत साबित हो रहे हैं और यह दिलचस्प है कि हमारे दोनों देशों में हमारे नेता कह रहे हैं कि हमें और अधिक लचीला बनने की जरूरत है। आप मेक इन इंडिया की बात करते हैं, हम बिल्ड कनाडा स्ट्रॉन्ग की बात करते हैं। यह एक बहुत दिलचस्प समानता है। हम अपने-अपने देशों को मजबूत कर रहे हैं, लेकिन साथ ही हम दीवारें नहीं खड़ी कर रहे हैं।"
भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर भारत में रूसी दूतावास के प्रेस सचिव, पेट्र सिजोव ने कहा, "बेशक, भारतीय अर्थव्यवस्था दुनिया की सबसे बड़ी, लगभग सबसे ज्यादा बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यह बहुत खुशी की बात है कि हम बहुत सारे प्रोजेक्ट्स एक साथ चला रहे हैं।"
--आईएएनएस
केके/एबीएम







