क्वेटा, 12 अगस्त (आईएएनएस)। बलूचिस्तान के सुराब जिले पर बुधवार को पाकिस्तानी सेना ने हवाई हमला किया। इस एयरस्ट्राइक में महिलाओं और बच्चों समेत 30 से ज्यादा बेगुनाह मारे गए जबकि कई घायल हो गए। बलूच कार्यकर्ताओं और मानवाधिकार समूहों ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है।
स्थानीय रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए, मानवाधिकार कार्यकर्ता मीर यार बलूच ने कहा कि पाकिस्तानी एयर फोर्स ने सुराब के गिदर इलाके में आम लोगों के इलाकों पर “जबरदस्त बमबारी” की, जिसमें आम लोग मारे गए और उनकी संपत्तियों को काफी नुकसान पहुंचा।
मीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “इन रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहां बम बरसाए गए वहां के अस्पतालों को सेना ने घेर रखा है। ये लोग चिकित्सकों और मेडिकल स्टाफ को डरा-धमका कर पीड़ितों का इलाज करने से रोक रहे हैं। रिपोर्ट्स से यह भी पता चला है कि कुछ लोगों की मौत समय पर इलाज न मिल पाने की वजह से हुई। लोगों ने यह भी बताया है कि ड्रोन और कोबरा गनशिप हेलीकॉप्टर इलाके के आसमान में लगातार पेट्रोलिंग कर रहे हैं।”
हमले की निंदा करते हुए, बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सबिहा बलूच ने कहा कि यह घटना दिखाती है कि पाकिस्तान कैसे बेगुनाह बलूचों (जिसमें बच्चे भी शामिल हैं) की हत्या कर अपने होने का एहसास कराता है। सबिहा ने इसे “नरसंहार” बताया।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सबिहा ने कहा, “वो इलाका पाकिस्तानी सेना से घिरा हुआ है। बचाव टीम, मेडिकल स्टाफ, एम्बुलेंस और पत्रकारों के आने-जाने पर पाबंदी लगा दी गई है। मानवीय मदद और स्वतंत्र दस्तावेजीकरण होने देने से रोकना गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है और इस पर तुरंत अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ध्यान देने की जरूरत है।”
उन्होंने पत्रकारों, मेडिकल टीमों, मानवीय संगठनों और दुनिया भर के लोगों से अपील की कि वे पीड़ितों तक तुरंत मदद पहुंचाने की कोशिशों को अंजाम दें।
इस बीच, ह्यूमन राइट्स बॉडी बलूच वॉयस फॉर जस्टिस (बीवीजे) ने घटना की तुरंत, स्वतंत्र, पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निगरानी वाली जांच की मांग की।
बीवीजे ने कहा, “मारे गए और घायल हुए लोगों की पहचान और जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए, और जो लोग इसके लिए जिम्मेदार हैं, उन्हें जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। आम लोगों – खासकर महिलाओं और बच्चों – की सुरक्षा करना देश की बुनियादी जिम्मेदारी है, और सभी सैन्य अभियान को अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और आम लोगों की जिंदगी की सुरक्षा से जुड़े सिद्धांतों का पालन करना चाहिए।”
मानवाधिकार संगठन ने संयुक्त राष्ट्र, यूएन मानवाधिकार मैकेनिज्म, अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीय संघ और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दूसरे सदस्यों से अपील की कि वो बलूचों पर रही "ज्यादती और युद्ध अपराधों" को लेकर चुप न रहें और पाकिस्तानी सेना की बर्बरता पर खुलकर बोलें।
--आईएएनएस
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