ढाका, 11 जुलाई (आईएएनएस)। बांग्लादेश में इस वर्ष जनवरी से जून के बीच सड़क दुर्घटनाओं में करीब 360 छात्रों की मौत हो गई, जबकि 109 अन्य घायल हुए। यह जानकारी बांग्लादेश पैसेंजर्स वेलफेयर एसोसिएशन (जात्री कल्याण समिति) ने शनिवार को जारी एक बयान में दी।
यूएनबी समाचार एजेंसी ने जात्री कल्याण समिति के महासचिव मोजम्मेल हक चौधरी के हवाले से रिपोर्ट प्रकाशित की। चौधरी ने 2011 के मीरसराय सड़क हादसे की 15वीं बरसी पर जारी बयान में कहा, "छात्रों के बीच सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाकर सुरक्षित सड़कें और अधिक अनुशासित समाज का निर्माण किया जा सकता है।"
उन्होंने कहा,"मीरसराय जैसी त्रासदी दोबारा न हो और इसे रोकने के लिए छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को शामिल कर नियमित सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम नहीं चलाए जा रहे हैं। इसके कारण हर साल बड़ी संख्या में छात्र सड़क हादसों का शिकार हो रहे हैं। कई घायल हो जाते हैं और कुछ हमेशा के लिए दिव्यांग हो जाते हैं।"
समिति के आंकड़ों के अनुसार, "जनवरी में 57 सड़क दुर्घटनाओं में 57 छात्रों की मौत हुई और 22 घायल हुए। फरवरी में 39 दुर्घटनाओं में 47 छात्रों की जान गई, जबकि 11 छात्र घायल हुए।"
मार्च सबसे घातक महीना रहा। इस दौरान 59 सड़क हादसों में 67 छात्रों की मौत हुई, जबकि एक छात्र घायल हुआ। अप्रैल में 51 दुर्घटनाओं में 56 छात्रों की मौत और 25 लोग घायल हुए। मई में सबसे अधिक 61 सड़क हादसे हुए, जिनमें 73 छात्रों की जान गई और 23 घायल हुए। वहीं जून में 53 दुर्घटनाओं में 60 छात्रों की मौत हुई तथा 27 अन्य घायल हुए।
मोजम्मेल हक चौधरी ने 11 जुलाई 2011 की मीरसराय त्रासदी को याद करते हुए कहा कि उस दिन चट्टोग्राम के मीरसराय उपजिला के विभिन्न स्कूलों के छात्रों को ले जा रहा एक मिनी ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में गिर गया था। इस हादसे में छात्रों समेत 45 लोगों की मौत हुई थी। इसे आज भी बांग्लादेश के इतिहास का सबसे भीषण एकल सड़क हादसा माना जाता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस हादसे के बाद भी सरकार ने छात्रों की सड़क सुरक्षा को लेकर कोई प्रभावी जागरूकता अभियान नहीं चलाया। नतीजतन, छात्रों और अभिभावकों में पर्याप्त जागरूकता विकसित नहीं हो सकी और हर साल बड़ी संख्या में युवा सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं।
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जात्री कल्याण समिति ने सरकार के सामने पांच प्रमुख सिफारिशें रखी हैं। इनमें स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों में सड़क सुरक्षा संबंधी विषय शामिल करना, प्रत्येक माह कम से कम एक घंटे का सड़क सुरक्षा जागरूकता सत्र आयोजित करना और इसमें विशेषज्ञों को शामिल करना शामिल है।
समिति ने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय राजमार्गों पर, विशेष रूप से स्कूलों के पास, सभी सड़क पार करने वाले स्थानों पर जेब्रा क्रॉसिंग बनाने और स्कूल क्षेत्र के स्पष्ट संकेतक बोर्ड लगाने की भी मांग की है।
इसके अलावा, स्कूलों के निकट राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजमार्गों पर लाल झंडे और परावर्तक जैकेट (वेस्ट) पहने 'रोड सेफ्टी गार्ड' तैनात करने की सिफारिश की गई है, ताकि वे यातायात रोककर छात्रों को सुरक्षित सड़क पार करा सकें। समिति ने प्रत्येक शैक्षणिक संस्थान में छात्रों और शिक्षकों की भागीदारी वाली सड़क सुरक्षा समिति गठित करने की भी मांग की है।
--आईएएनएस
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