लखनऊ, 5 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र का बुधवार को तीसरा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। योगी सरकार ने मंगलवार को 59,019 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया था। आज इसी अनुपूरक बजट पर चर्चा होनी थी, लेकिन समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के विरोध-प्रदर्शन के कारण विधानसभा की कार्यवाही को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई। इसके बाद मीडिया से बात करते हुए एनडीए नेताओं ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला और इसे लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला बताया।
मंत्री मनोज पांडे ने कहा, "आज समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के सदस्यों ने जिस तरह से सदन का अपमान किया, स्पीकर के फैसलों का अनादर किया और जैसा व्यवहार किया, उससे लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों को ठेस पहुंची है। उनसे और क्या उम्मीद की जा सकती है।"
मंत्री संजय निषाद ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा, "जो भी घटनाएं हुई हैं, वे दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय हैं। चर्चा की एक उचित परंपरा होनी चाहिए और सदन की गरिमा बनी रहनी चाहिए। सभी मामलों पर विधानसभा में चर्चा होनी चाहिए, जहां सभी तथ्य सामने आएंगे कि किसने क्या और कब किया।"
कैबिनेट मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने विपक्ष पर विकास में बाधा डालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "सदन में विपक्ष का व्यवहार बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। विधानसभा का मुख्य उद्देश्य राज्य का विकास सुनिश्चित करना है लेकिन विपक्ष लगातार अपनी हरकतों से कार्यवाही में बाधा डाल रहा है और राज्य के विकास में रुकावटें पैदा कर रहा है।"
मंत्री सुनील शर्मा ने कहा, "सरकार चर्चा के लिए तैयार थी लेकिन विपक्ष की मंशा ही सदन चलने देने की नहीं है।वे सदन को चलने नहीं दे रहे हैं। सरकार चर्चा करना चाहती है, सरकार चाहती है कि बहस हो, लेकिन वे सदन को चलने कहां दे रहे हैं?"
भाजपा विधायक अभय सिंह ने हंगामे को निंदनीय बताया और कहा कि बजट जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, "यह पूरी तरह से निंदनीय है। ऐसी अराजकता और अव्यवस्था की स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए। सदन नियमों के अनुसार चलता है, और विधानसभा राज्य का एकमात्र ऐसा मंच है जहाँ लोगों के हित में चर्चा हो सकती है। उदाहरण के लिए, जब 50,000 करोड़ या 54,000 करोड़ का बजट पेश किया जाता है, तो चर्चा इस बात पर होनी चाहिए कि स्वास्थ्य सेवा, बिजली, पानी, सड़क और रोजगार के लिए विभिन्न विभागों में क्या प्रावधान किए गए हैं। विपक्ष को इन मुद्दों की कोई परवाह नहीं है।"