नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। विदेश मंत्रालय (एमईए) ने मंगलवार को फिर दोहराया कि भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को यूनाइटेड किंगडम (यूके) से भारत लाया जाएगा, लेकिन इसके लिए वहां चल रही सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पूरा होना जरूरी है।
मंगलवार को नई दिल्ली में हुई द्वि-साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए एमईए के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "नीरव मोदी के मामले में, जैसा कि हमने पहले भी बताया है, यूके में कुछ न्यायिक प्रक्रियाएं अभी चल रही हैं। जब ये कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी, उसके बाद उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।"
उन्होंने कहा कि हम इन कानूनी प्रक्रियाओं पर करीब से नजर रख रहे हैं। सरकार का रुख साफ है कि सभी भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया जाना चाहिए और उन्हें यहां की न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना चाहिए।
मार्च में लंदन स्थित हाई कोर्ट ऑफ जस्टिस की किंग्स बेंच डिवीजन ने नीरव मोदी की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण आदेश के खिलाफ दोबारा सुनवाई शुरू करने की मांग की थी।
इस मामले में ब्रिटेन की क्राउन प्रॉसिक्यूशन सर्विस के वकील ने दलीलें रखीं। उन्हें केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की एक विशेष टीम ने सहायता दी, जिसमें वे जांच अधिकारी भी शामिल थे जो सुनवाई में मदद के लिए लंदन गए थे।
मामले को दोबारा खोलने की यह याचिका बचाव पक्ष के बिचौलिए संजय भंडारी के मामले में यूके हाई कोर्ट के दिए गए फैसले के आधार पर दायर की गई थी।
नीरव मोदी भारत में पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मामले में वांछित है। आरोप है कि सरकारी बैंक के नाम पर जारी फर्जी गारंटी का इस्तेमाल करके विदेशों से कर्ज लिया गया था। इसके बाद जनवरी 2018 में वह भारत छोड़कर चला गया था।
इसके कुछ समय बाद ही सीबीआई ने घोटाले की जांच शुरू की थी। 2019 में ब्रिटेन में उसकी गिरफ्तारी के बाद वहां की अदालतों ने उसके भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दे दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालतों ने भारत में उसके साथ व्यवहार को लेकर दी गईं आश्वासनों को स्वीकार किया था और पाया था कि उसके प्रत्यर्पण में कोई कानूनी रुकावट नहीं है।
इसके बाद उसकी पहले की अपीलों को भी खारिज कर दिया गया था।
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