नई दिल्ली, 11 अगस्त (आईएएनएस)। हाथी अपने पैरों और सूंड के जरिए धरती में 20 हर्ट्ज से भी कम फ्रीक्वेंसी वाले इंफ्रासाउंड पैदा करते हैं। इन्हें सेस्मिक वाइब्रेशन कहा जाता है। ये कंपन 32 किलोमीटर दूर तक महसूस किए जा सकते हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक, हाथियों के पैरों में 'पैसिनियन कॉर्पसल्स' नाम की विशेष कोशिकाएं होती हैं। ये कोशिकाएं जमीन के कंपनों को पकड़कर हड्डियों के रास्ते सीधे कानों तक पहुंचा देती हैं।
सिर्फ यही नहीं, इनकी सूंड में 40,000 से अधिक मांसपेशियां होती हैं, जो एक मानव शरीर की कुल मांसपेशियों से कहीं अधिक हैं, और वे आइने में खुद को पहचानने की दुर्लभ क्षमता भी रखते हैं। पृथ्वी के इन अद्भुत और बेहद बुद्धिमान जीवों के संरक्षण का वैश्विक संदेश देने के लिए हर साल 12 अगस्त को 'विश्व हाथी दिवस' मनाया जाता है।
12 अगस्त 2012 को पहली बार यह दिवस आधिकारिक तौर पर कनाडाई फिल्म निर्माता पेट्रीशिया सिम्स और थाईलैंड के 'एलिफेंट रीइंट्रोडक्शन फाउंडेशन' द्वारा शुरू किया गया था। इस साल इस दिवस का मूल उद्देश्य हाथियों के शिकार और मानव-हाथी संघर्ष को रोकना है।
हाथी केवल जंगल की शान नहीं हैं, बल्कि विज्ञान उन्हें 'इकोसिस्टम इंजीनियर' और 'क्लाइमेट हीरो' मानता है। एक अकेला वन हाथी लगभग 250 एकड़ जंगल की कार्बन कैप्चर क्षमता को बढ़ा सकता है, जो 2,047 कारों के वार्षिक उत्सर्जन को वातावरण से हटाने के बराबर है। आर्थिक दृष्टि से, एक हाथी द्वारा प्रदान की जाने वाली कार्बन कैप्चर सेवा का मूल्य 1.75 मिलियन डॉलर तक आंका गया है। जब हाथी जंगल में घूमते हैं, तो वे कम कार्बन घनत्व वाले छोटे पेड़ों को खा जाते हैं और उन्हें रौंद देते हैं, जिससे बड़े और उच्च कार्बन घनत्व वाले पेड़ों को बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह और धूप मिलती है।
अपने 18 से 22 महीने के लंबे गर्भकाल (जो भूमि स्तनधारियों में सबसे लंबा है) के बाद जब वे बच्चों को जन्म देते हैं, तो हाथियों का झुंड उन्हें मीलों दूर तक ले जाता है। इस यात्रा में वे अपने मल के जरिए बड़े पेड़ों के बीजों को दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे जंगलों का लगातार विस्तार होता रहता है। विडंबना यह है कि कई रिपोर्ट में मौजूद जानकारी के अनुसार, दांतों के अवैध व्यापार के कारण हर दिन लगभग 50 अफ्रीकी हाथियों की हत्या कर दी जाती है।
वैश्विक एशियाई हाथियों की करीब 50 प्रतिशत से अधिक आबादी भारत में पाई जाती है, इसलिए भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत सरकार के 'प्रोजेक्ट एलीफेंट' (1992) के तहत देश में 33 हाथी रिजर्व और 150 से अधिक हाथी कॉरिडोर स्थापित किए गए हैं। भारत की पहली डीएनए-आधारित वैज्ञानिक हाथी गणना (अक्टूबर 2025 में जारी रिपोर्ट) के अनुसार, देश में जंगली हाथियों की कुल संख्या 22,446 दर्ज की गई है।
भारत में मानव-हाथी सह-अस्तित्व के तकनीकी और भावनात्मक दोनों मोर्चों पर शानदार काम हो रहा है। ऑस्कर विजेता भारतीय डॉक्यूमेंट्री 'द एलीफेंट विस्परर्स' ने मुदुमलाई टाइगर रिजर्व में 'बोम्मन' और 'बेली' द्वारा अनाथ हाथी बच्चों (रघु और अम्मू) की निस्वार्थ देखभाल को दिखाकर पूरी दुनिया को भावुक कर दिया था।
तकनीकी मोर्चे पर, भारतीय रेलवे ने 'गजराज सिस्टम' नाम की एआई-आधारित सुरक्षा प्रणाली लागू की है। करीब 181 करोड़ रुपए की लागत वाला यह सिस्टम पटरियों के नीचे बिछे ऑप्टिकल फाइबर केबल के जरिए हाथियों के पैरों के कंपन को 99.5 प्रतिशत सटीकता के साथ पहचान कर ट्रेन चालकों को अलर्ट कर देता है। इसके अतिरिक्त, केरल और कर्नाटक जैसे राज्यों में मधुमक्खी के छत्तों और मिर्च की बाड़ का रचनात्मक उपयोग किया जा रहा है, ताकि हाथियों को सुरक्षित तरीके से मानव बस्तियों से दूर रखा जा सके।
12 अगस्त 2026 को विश्व हाथी दिवस हमें यह याद दिलाता है कि यदि हाथियों का अस्तित्व मिटा, तो हमारी पृथ्वी का जलवायु संतुलन भी खतरे में पड़ सकता है।
--आईएएनएस
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