नई दिल्ली, 28 जुलाई (आईएएनएस)। पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल को लेकर संसद में विपक्षी सांसदों ने सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने पेपर लीक की घटनाओं, छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सरकार से जवाब मांगा। विपक्ष ने कहा कि केवल सख्त कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा बल्कि पूरी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने आईएएनएस से कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुरुआत से ही कुछ प्रमुख मांगें रखी थीं, जिनमें तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों के साथ कथित बर्बरता रोकना और छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेना शामिल था। सरकार को आखिरकार इन मुद्दों पर कदम उठाने पड़े हैं।
इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि पेपर लीक का मुद्दा सिर्फ कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की जवाबदेही से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि 2024 में भी सरकार इसी तरह का बिल लेकर आई थी, लेकिन उसके बाद भी परीक्षा व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं आए। विपक्ष संसद में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा करेगा और सरकार से जवाब मांगेगा।
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने जौहर यूनिवर्सिटी के मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जिस देश में विश्वविद्यालयों को गिराने के आदेश दिए जाते हैं, वहां यह सोचने की जरूरत है कि शिक्षा संस्थानों के साथ कैसा व्यवहार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय देश की विरासत का हिस्सा होते हैं और सरकार को राजनीतिक विरोध से ऊपर उठकर शिक्षा संस्थानों को बचाने की दिशा में काम करना चाहिए। शिक्षा के मंदिरों को नुकसान पहुंचाने के बजाय उन्हें मजबूत किया जाना चाहिए।
कांग्रेस सांसद करमवीर सिंह बौद्ध ने छात्रों के साथ कथित पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बच्चों और युवा छात्राओं के साथ बेरहमी से व्यवहार करना देश के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना विपक्ष की जिम्मेदारी है और अगर छात्रों के अधिकारों के लिए आवाज उठाना गलत माना जाता है, तब भी विपक्ष अपनी भूमिका निभाता रहेगा। उन्होंने संविधान के तहत सभी नागरिकों को सम्मान और अधिकार मिलने की बात कही।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने पब्लिक एग्जामिनेशन बिल पर कहा कि संसद में लंबी चर्चा के दौरान कई महत्वपूर्ण सवाल उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि सरकार का यह दावा कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट और सख्त सजा से समस्या खत्म हो जाएगी, पर्याप्त नहीं है।
थरूर ने कहा कि सवाल यह है कि परीक्षा प्रणाली में बार-बार गड़बड़ी क्यों हो रही है और इसे रोकने के लिए सरकार ने क्या ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसी मंत्री का इस्तीफा कुछ परिस्थितियों में जरूरी हो सकता है, लेकिन इससे पूरी समस्या का समाधान नहीं होगा। उन्होंने पूरे सिस्टम की जांच और बड़े सुधारों की जरूरत बताई।
आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा कि समस्या केवल कानूनों की कमी नहीं है, बल्कि व्यवस्था की नीयत और कार्यप्रणाली से जुड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मामलों में गलत काम सामने आने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि सरकार को परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
आरजेडी सांसद संजय यादव ने बिहार में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान एके-47 से फायरिंग की घटना को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक इतिहास में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर इस तरह की कार्रवाई बेहद गंभीर मामला है।
उन्होंने सवाल उठाया कि छात्रों के खिलाफ हथियारों के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने पुलिस कार्रवाई के दौरान तय नियमों और मानकों के पालन पर भी सवाल खड़े किए।
समाजवादी पार्टी के सांसद अफजल अंसारी ने कहा कि पेपर लीक रोकने के लिए पहले भी कानून मौजूद थे लेकिन समस्या उनके प्रभावी अनुपालन की है। उन्होंने कहा कि कई पुराने मामलों में अभी तक निर्णय नहीं हो पाया है और ऐसे में फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सजा बढ़ाने का प्रावधान किया है, जिसमें 10 साल तक की जेल और करोड़ों रुपये के जुर्माने जैसी बातें शामिल हैं लेकिन असली सवाल यह है कि कानून लागू कैसे होगा।
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने सरकार से पूछा कि यदि नए कानून के बाद भी पेपर लीक होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि केवल जुर्माना बढ़ाने और सजा कड़ी करने से समस्या खत्म नहीं होगी। कीर्ति आजाद ने कहा कि सरकार ने पहले पेपर लीक के खिलाफ बेहद सख्त कानून लाने की बात कही थी, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि परीक्षा प्रणाली की कमजोरियों को दूर किया जाए।
--आईएएनएस
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