Advertisement banner

उत्तराखंड: आगामी त्योहारों को देखते हुए सरकार ने मिलावटखोरों और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई तेज की

उत्तराखंड:

देहरादून, 25 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तराखंड सरकार ने मंगलवार को आने वाले त्योहारों को देखते हुए मिलावटखोरों और जमाखोरों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। पूरे राज्य में बड़े पैमाने पर जांच और प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अधिकारियों को सभी जिलों में हफ्तेभर अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। डिविजनल कमिश्नरों को इस अभियान की निगरानी करने और खाने-पीने की चीजों में मिलावट, जमाखोरी और दूसरे नियमों को तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

पूरे उत्तराखंड में खाने-पीने की दुकानों और प्रतिष्ठानों पर छापे मारे जा रहे हैं, जांच की जा रही है और सैंपल लिए जा रहे हैं। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया है कि वे एक्सपायर हो चुके, खराब और घटिया क्वालिटी के खाने-पीने के सामान को मौके पर ही नष्ट कर दें। नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, और कई मामलों में कोर्ट में केस भी शुरू किए गए हैं।

अधिकारी जरूरी चीजों, खासकर चीनी की जमाखोरी और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के कमर्शियल इस्तेमाल पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं। देहरादून में सोमवार को खाने-पीने की चीजों के 11 सैंपल लिए गए। 1 अगस्त से अब तक अधिकारियों ने जिले में 70 प्रतिष्ठानों की जांच की है और टेस्टिंग के लिए 48 सैंपल लिए हैं। हरिद्वार में 47 प्रतिष्ठानों की जांच की गई और 27 सैंपल लिए गए।

नैनीताल में 10 दुकानों की जांच की गई और छह सैंपल लिए गए, जबकि 10 किलो घटिया क्वालिटी की मिठाइयां नष्ट कर दी गईं। पौड़ी में दस, बागेश्वर में तीन, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ में दो-दो, टिहरी में छह और उत्तरकाशी में चार सैंपल लिए गए। चंपावत में 21 जगहों की जांच की गई और 10 सैंपल जांच के लिए लैब भेजे गए।

सरकार की ओर से यह अभियान रक्षा बंधन, कृष्ण जन्माष्टमी, नवरात्रि और दिवाली जैसे कई बड़े त्योहारों से पहले चलाया जा रहा है। एफएसएसआई (भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण) राज्य के अधिकारियों के साथ मिलकर खाने-पीने की चीजों में मिलावट को रोकने के लिए सख्त जांच, मोबाइल टेस्टिंग लैब और भारी कानूनी जुर्माने के जरिए पूरे देश में जीरो-टॉलरेंस वाला सिस्टम लागू करता है।

एफएसएसआई, रिस्क-बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (आरबीआईएस) के जरिए ऑडिट और रैंडम सैंपलिंग को प्राथमिकता देता है, जिसमें डेयरी, मसाले और खाने के तेल जैसी ज्यादा रिस्क वाली कैटेगरी पर ध्यान दिया जाता है।

मौके पर ही तुरंत जांच के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 305 से ज्यादा मोबाइल फूड टेस्टिंग लैबोरेटरी (एमएफटीएल) काम कर रही हैं, जिन्हें 'फूड सेफ्टी ऑन व्हील्स' (एफएसडब्ल्यू) के नाम से जाना जाता है। नियामक कार्रवाई के कारण जहरीले विकल्प या सिंथेटिक उत्पाद बांटने वाले दोषियों पर हजारों की संख्या में जुर्माना लगाया गया है, उनके लाइसेंस रद्द किए गए हैं और उन्हें सजा सुनाई गई है। प्रस्तावित नियमों में गंभीर उल्लंघन के लिए 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और उम्रकैद की सजा का भी प्रावधान है।

--आईएएनएस

एसडी/पीएम