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कांग्रेस का पूरा वंदे मातरम नहीं गाना दुर्भाग्यपूर्ण : मंत्री मनोज पांडे

Minister

लखनऊ, 21 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री मनोज पांडे ने कांग्रेस की ओर से पूरा वंदे मातरम नहीं गाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

उन्होंने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि इस देश को आजाद कराने के लिए न जाने कितने लोगों ने प्राणों की आहुति दे दी। कितनी ही बहनों के सुहाग उजड़ गए। लेकिन, आज एक राजनीतिक दल वंदे मातरम गाने से परहेज कर रहा है। इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है? आप ऐसा कैसे बोल सकते हैं कि हम वंदे मातरम के इतने हिस्से को गाएंगे और बाकी के हिस्से को नहीं। ये तो पूरी असंवैधानिक बात है। आखिर आप इस तरह की बातें कैसे कर सकते हैं? देश की लोकसभा ने इसे पारित किया है और इसे आप गाने से मना कर रहे हैं।

मंत्री मनोज पांडे के मुताबिक, यह कांग्रेस का दोहरा रवैया है, जहां आप लोग संविधान का जिक्र तो करते हैं। लेकिन, वंदे मातरम गाने से इनकार कर देते हैं और सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं। आप न्यायालय पर सवाल उठाते हैं। आप संविधान की बात भी करते हैं और भारत माता की जय बोलने पर भी आप लोगों को गुरेज होता है। ये कैसा दोहरा चरित्र है? भारत के लोग इसे देख रहे हैं। देश के लोग कांग्रेस से दुखी हैं।

उन्होंने सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भाजपा आगामी 2027 का विधानसभा चुनाव हारने जा रही है। मंत्री मनोज पांडे ने कहा कि अगर कोई राजनीतिक दल अपनी कुंडली के बारे में खुद पता लगा ले रहा है, तो हमें इससे कोई परहेज नहीं है। लेकिन, काश इन लोगों ने इस कुंडली को 2014, 2017 और 2022 के चुनाव में भी देख लिया होता, तो आज इस तरह की स्थिति पैदा नहीं हुई होती। इन लोगों को सही आकलन हो जाता है। अब जब ये लोग 2027 के चुनाव को लेकर इस तरह के दावे कर रहे हैं, तो मुझे इससे कोई आपत्ति नहीं है। सभी लोगों को सपने देखने का हक है।

उन्होंने भारत-जापान के रिश्ते पर कहा कि जापान ने तकनीक के क्षेत्र में बहुत तरक्की की है। आने वाले दिनों में इस तकनीक का फायदा उत्तर प्रदेश को भी मिलेगा।

मंत्री मनोज पांडे ने कहा कि मैं हमेशा से ही इस बात पर जोर देता हूं कि लोगों को संवैधानिक संस्थाओं पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से बचना चाहिए। यह इन लोगों का दोहरा रवैया है। एक तरफ जहां इन लोगों ने दिल्ली के जंतर-मंतर में छात्रों के हित में आलाज बुलंद करने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ जब झारखंड में छात्रों के ऊपर लाठीचार्ज हुए, तो इन लोगों ने एक शब्द बोलना भी मुनासिब नहीं समझा।

--आईएएनएस

एसएचके/एबीएम