रांची, 14 जून (आईएएनएस)। झारखंड में आगामी राज्यसभा चुनाव, बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर सीपीआई (एमएल) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। राज्य समिति की बैठक के बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीपीआई (एमएल) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि झारखंड के सामने राज्यसभा चुनाव एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
सीपीआई (एमएल) के नेता दीपांकर भट्टाचार्य ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इंडी अलायंस ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो उम्मीदवार उतारे हैं। इंडी अलायंस के पास पर्याप्त विधायक हैं और उनके वोट भी इंडी अलायंस के पक्ष में हैं। इसके बावजूद भाजपा द्वारा उद्योगपति परिमल नतवानी को आगे कर राजनीतिक तोड़फोड़ की कोशिश की जा रही है।
इंडी अलायंस की हालिया बैठक का उल्लेख करते हुए नेताओं ने कहा कि गठबंधन में शामिल सभी दलों के बीच आपसी सम्मान, विश्वास और सामूहिक नेतृत्व की भावना को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि भाजपा राज्यसभा चुनाव के माध्यम से गठबंधन को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, लेकिन उनके विधायक एकजुट हैं और भाजपा की रणनीति सफल नहीं होगी।
दीपांकर भट्टाचार्य ने कहा कि देशभर के युवाओं में परीक्षा प्रणाली को लेकर भारी नाराजगी है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी निभाने वाली एजेंसियां लगातार विफल साबित हो रही हैं और कोई भी परीक्षा सुचारू रूप से संपन्न नहीं हो पा रही है। इस मुद्दे को लेकर युवाओं का आंदोलन तेज हो रहा है।
महंगाई पर केंद्र सरकार को घेरते हुए उन्होंने कहा कि सरकार आर्थिक संकट का ठीकरा अंतरराष्ट्रीय युद्धों पर फोड़ना चाहती है। उनका कहना था कि यदि युद्ध ही संकट का कारण है तो सरकार को यह भी बताना चाहिए कि उसने इजरायल का समर्थन क्यों किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति विफल रही है और इसके कारण देश के नाविकों तथा नागरिकों की सुरक्षा प्रभावित हुई है। नेताओं ने कहा कि रुपए की गिरती कीमत, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती दरें और महंगाई पिछले कई वर्षों की नीतिगत विफलताओं का परिणाम हैं।
भट्टाचार्य ने “दाम घटाओ, जीने लायक वेतन दो” अभियान की घोषणा करते हुए बताया कि 15 जून से 15 जुलाई तक ग्रामीण क्षेत्रों में और अगस्त महीने में पूरे देश में व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की गई। दीपांकर भट्टाचार्य ने दावा किया कि झारखंड में लगभग 1.40 लाख मतदाताओं के नाम विभिन्न तकनीकी और तथाकथित ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ के आधार पर हटाने की तैयारी की जा रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में भी इसी प्रकार की प्रक्रिया के कारण लाखों मतदाताओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। लोकतंत्र में मतदान के अधिकार की रक्षा करना आज सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।
इसके साथ ही भाजपा पर देश में बहुदलीय लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा गया कि पार्टी केवल सत्ता हासिल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों को समाप्त कर एक-दलीय व्यवस्था स्थापित करना चाहती है। लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए विभिन्न विचारधाराओं वाली पार्टियों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा।