बेंगलुरु, 6 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता और वरिष्ठ भाजपा नेता आर. अशोक ने सोमवार को राज्य सरकार से विशेष आग्रह किया। उन्होंने कहा कि सरकार औद्योगिक और आवासीय परियोजनाओं के लिए कृषि भूमि का अधिग्रहण बंद करे और इसके बजाय बंजर भूमि का इस्तेमाल करे या बड़े विकास कार्यों को उत्तरी कर्नाटक में ले जाए।
बेंगलुरु के बाहरी इलाके में अनेकल तालुक के सरजापुर में केआईएडीबी (कर्नाटक औद्योगिक क्षेत्र विकास बोर्ड) द्वारा प्रस्तावित जमीन अधिग्रहण के खिलाफ विरोध कर रहे किसानों को संबोधित करते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि अधिग्रहण प्रक्रिया में कानूनी अड़चनों के बावजूद सरकार गलत तरीके से किसानों को निशाना बना रही है।
भाजपा नेता ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार को बेंगलुरु के आसपास विकास पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय उत्तरी कर्नाटक में औद्योगीकरण को बढ़ावा देने पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने तर्क दिया कि इस कदम से राज्य की राजधानी पर दबाव कम होगा और संतुलित क्षेत्रीय विकास सुनिश्चित होगा।
उन्होंने कहा, "बेंगलुरु और उसके आसपास उपजाऊ जमीन का बार-बार अधिग्रहण करने के बजाय, सरकार को उत्तरी कर्नाटक में उद्योगों को बढ़ावा देना चाहिए। इससे पिछड़े इलाकों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और कृषि योग्य भूमि को नष्ट होने से बचाया जा सकेगा।"
उन्होंने दावा किया कि केआईएडीबी जबरन किसानों की जमीन का अधिग्रहण कर रहा है और बताया कि हालांकि अदालत ने पहले इस अधिग्रहण को रद्द कर दिया था, फिर भी जमीन मालिकों को नए नोटिस भेजे जा रहे हैं। उनके अनुसार, प्रभावित कई परिवारों के पास जमीन के छोटे-छोटे टुकड़े हैं और वे अपनी आजीविका के लिए पूरी तरह से खेती पर निर्भर हैं।
अशोक ने कहा कि सरजापुर इलाका रेशम उत्पादन (सेरीकल्चर) के लिए शहतूत की खेती और सब्जियों की फसलों के लिए जाना जाता है, जिससे यहां की जमीन बहुत उपजाऊ है और औद्योगिक विकास के लिए उपयुक्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि उद्योग केवल बंजर या खेती के अयोग्य जमीन पर स्थापित किए जाने चाहिए, न कि उन उपजाऊ खेतों पर जो हजारों किसान परिवारों का पेट पालते हैं।
अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार पर्यावरण पर पड़ने वाले असर पर विचार किए बिना बेंगलुरु के आसपास तेजी से लेआउट (आवासीय/व्यावसायिक क्षेत्र) विकसित कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि बड़े पैमाने पर शहरी विस्तार से भूजल संसाधनों में कमी आएगी और इस क्षेत्र की झीलों और अन्य जल निकायों पर बुरा असर पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में पहले से ही कई उद्योग, आईटी कंपनियां और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स मौजूद हैं, और साथ ही यह क्षेत्र भारी ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे पर दबाव का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी क्षेत्र में और उद्योग स्थापित करने से ये मौजूदा समस्याएं और बढ़ेंगी।
राजनीतिक हमला करते हुए अशोक ने आरोप लगाया कि लेआउट विकसित करने के पीछे सरकार का मुख्य मकसद कमीशन कमाना है।
उनके अनुसार, बिदादी और सरजापुर जैसे इलाकों में प्रस्तावित लेआउट का मकसद असली विकास परियोजनाएं नहीं, बल्कि सत्ताधारी पार्टी के लिए 'फंड जुटाने वाले लेआउट' के तौर पर काम करना था।
अशोक ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार किसानों की चिंताओं के प्रति उदासीन है और एक विवादास्पद दावा किया कि स्थानीय किसानों के हितों की रक्षा करने के बजाय, सरकार चुनावी समर्थन हासिल करने के लिए 'बांग्लादेशी निवासियों' को वोटर आईडी कार्ड जारी करने में ज्यादा दिलचस्पी ले रही है।
किसान आंदोलन का जिक्र करते हुए विपक्ष के नेता ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निंदा की और कहा कि अपनी जमीन और आजीविका बचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे किसानों पर बल प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने आंदोलनकारी किसानों को भरोसा दिलाया कि कर्नाटक विधानसभा के आगामी सत्र में यह मुद्दा उठाया जाएगा और कहा कि भाजपा सरकार की किसान-विरोधी जमीन अधिग्रहण नीतियों का विरोध जारी रखेगी।
--आईएएनएस
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