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उज्जैन में छात्राओं के विरोध का असर, सराफा गर्ल्स स्कूल की शिफ्टिंग पर लगी रोक

उज्जैन

उज्जैन, 18 अगस्त (आईएएनएस)। उज्जैन के ऐतिहासिक सराफा गर्ल्स स्कूल को शहर से करीब 10 से 15 किलोमीटर दूर दावतखेड़ी में शिफ्ट किए जाने के फैसले का छात्राओं द्वारा विरोध किए जाने के बाद प्रशासन ने शिफ्टिंग रोकने का निर्णय लिया है। छात्राओं की सुरक्षा, दूरी और आने-जाने में होने वाली परेशानी को देखते हुए अब तय किया गया है कि जब तक नए स्कूल भवन के लिए वैकल्पिक व्यवस्था पूरी नहीं हो जाती, तब तक छात्राएं सराफा स्थित मौजूदा स्कूल परिसर में ही पढ़ाई करेंगी।

भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने बताया कि स्कूल को लेकर लिया गया निर्णय जनप्रतिनिधियों और प्रदेश के मुख्यमंत्री के साथ चर्चा के बाद लिया गया है। उन्होंने कहा कि छात्राएं अपनी समस्या लेकर प्रशासन के पास पहुंची थीं, लेकिन उस दिन कलेक्टर से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद छात्राओं ने वीडियो जारी कर अपनी बात सामने रखी, जिसके बाद उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार किया गया।

फिरोजिया ने कहा कि छात्राओं की परेशानी वास्तविक है। यदि स्कूल को करीब 15 किलोमीटर दूर स्थानांतरित किया जाता है तो छात्राओं को रोजाना आने-जाने में काफी असुविधा होगी। बस की सुविधा उपलब्ध कराने के बावजूद बस खराब होने या किसी अन्य परिस्थिति में छात्राओं को परेशानी हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए फिलहाल स्कूल को मौजूदा स्थान पर ही संचालित करने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने बताया कि महाकाल क्षेत्र के आसपास भीड़ की वजह से छात्राओं को आने-जाने में परेशानी होती थी। इस समस्या को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर पीछे की ओर सड़क निर्माण का काम भी कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने नए स्कूल के लिए बजट आवंटित कर दिया है। साथ ही, विधायक और कलेक्टर को शहर के बीच या आसपास उपयुक्त जमीन चिन्हित करने की जिम्मेदारी दी गई है, ताकि भविष्य में छात्राओं को दूर न जाना पड़े।

सांसद ने आगे कहा कि जब तक नए स्कूल भवन का निर्माण पूरा नहीं हो जाता, तब तक सराफा गर्ल्स स्कूल को यहां से शिफ्ट नहीं किया जाएगा। नई बिल्डिंग तैयार होने के बाद ही स्कूल को स्थानांतरित करने पर विचार किया जाएगा।

छात्रा वंशिका चन्द्रावत ने प्रशासन के फैसले पर खुशी जताई। उन्होंने कहा कि छात्राओं की जिन मांगों को लेकर विरोध किया जा रहा था, उनमें से उनकी मुख्य मांग पूरी हो गई है। उन्होंने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का धन्यवाद किया, साथ ही मीडिया का भी आभार जताया, जिसके माध्यम से छात्राओं की बात शहरभर तक पहुंची और प्रशासन तक मामला पहुंचा। छात्रा ने कहा कि प्रशासन का फैसला है कि फिलहाल स्कूल की शिफ्टिंग दावतखेड़ी नहीं होगी। छात्रा ने आग्रह किया कि यदि कभी स्कूल को स्थानांतरित करने की जरूरत पड़े तो उसे शहर के अंदर ही करीब एक से डेढ़ किलोमीटर के दायरे में रखा जाए, ताकि छात्राओं को आने-जाने में परेशानी न हो।

छात्रा मोनिका सिसोदिया ने कहा कि स्कूल की शिफ्टिंग का विरोध करने के पीछे सबसे बड़ी वजह छात्राओं की सुरक्षा थी। दावतखेड़ी में गर्ल्स और बॉयज स्कूल के साथ होने को लेकर कई अभिभावक सहमत नहीं थे। इसके अलावा मौजूदा स्कूल से प्रस्तावित स्थान की दूरी भी करीब 10 से 12 किलोमीटर बताई गई।

मोनिका ने कहा कि इतनी दूरी होने पर रोजाना आने-जाने के दौरान किसी दुर्घटना या अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी को लेकर भी अभिभावक चिंतित थे। शहर के बीच नए स्कूल बनाए जाने के फैसले का स्वागत करते हुए छात्रा ने कहा कि छात्राएं शहर के बीच में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। उनके मुताबिक, मौजूदा स्कूल के पास महाकाल थाना भी है और आसपास लोगों की मौजूदगी के कारण उन्हें सुरक्षा का भरोसा रहता है।

--आईएएनएस

पीएसके