नई दिल्ली, 10 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कचरा प्रबंधन और सड़कों पर आवारा मवेशियों को लेकर उठाए गए नागरिक मुद्दों पर संज्ञान लिया है। स्पीकर गुप्ता ने सोमवार को दोनों मामलों को एमसीडी की स्पेशल कमिटी को भेज दिया और विधायकों की शिकायतों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी।
कचरा प्रबंधन के मामले में गुप्ता ने एमसीडी कमिश्नर को कमिटी के सामने पेश होने, सदस्यों द्वारा उठाए गए मुद्दों का जवाब देने और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेशन को मौजूदा व्यवस्थाओं और किए गए सुधारात्मक उपायों का स्पष्ट विवरण कमिटी के सामने रखना चाहिए।
कचरा प्रबंधन का मुद्दा विधायक अनिल गोयल ने नियम 280 के तहत उठाया था, जिसमें उन्होंने कचरा जमा होने वाली जगहों, खुले डस्टबिन, कचरा उठाने की अपर्याप्त व्यवस्था और साफ-सफाई से जुड़ी चिंताओं की ओर इशारा किया था।
गुप्ता ने कहा कि साफ-सफाई और स्वच्छता दिल्ली नगर निगम की जिम्मेदारी है और कॉरपोरेशन को इस जिम्मेदारी को प्रभावी ढंग से निभाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि जिन कॉन्ट्रैक्टरों को कचरा उठाने का काम सौंपा गया है, अगर वे ठीक से काम नहीं कर रहे हैं, तो उनके कामकाज और जवाबदेही की भी जांच की जानी चाहिए।
विधायक हरीश खुराना ने आवारा मवेशियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने बताया कि दिल्ली के कुछ इलाकों में मवेशियों को बार-बार सड़कों पर छोड़ दिया जाता है, खासकर दूध निकालने के बाद गैर-कानूनी डेयरी चलाने वालों द्वारा यह किया जाता है।
गुप्ता ने कहा कि सड़कों पर खुलेआम घूम रहे मवेशियों की वजह से दुर्घटनाएं हो रही हैं और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से मवेशियों को सड़कों पर छोड़ा जा रहा है, उससे लगता है कि इसके पीछे कोई संगठित सिस्टम काम कर रहा है। उन्होंने इस मुद्दे को गंभीर चिंता का विषय बताया और कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए।
आवारा मवेशियों की स्थिति को 'चिंताजनक' बताते हुए गुप्ता ने कहा कि यह समस्या दिन-ब-दिन गंभीर होती जा रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के नागरिकों की सुरक्षा और जानवरों की भलाई के लिए तुरंत कदम उठाने की जरूरत है।
इस मामले को एमसीडी की स्पेशल कमेटी को सौंपते हुए उन्होंने कॉरपोरेशन को निर्देश दिया कि वे विधानसभा को की जा रही कार्रवाई के बारे में जानकारी दें। साथ ही, उन्होंने एमसीडी कमिश्नर से दिल्ली में गौशालाओं की संख्या, उनमें उपलब्ध जगह और क्षमता, बचाए गए मवेशियों को रखने की व्यवस्था, मवेशियों को जब्त करने के बाद अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और उन्हें सार्वजनिक सड़कों पर छोड़ने के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
उन्होंने कहा कि इस मामले पर सिविक एजेंसी की सबसे बड़ी फैसला लेने वाली स्पेशल कमिटी को तुरंत ध्यान देने और इसकी पूरी तरह से जांच करने की जरूरत है।
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