नई दिल्ली, 13 जून (आईएएनएस)। दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने बताया कि विभाग ने सरकार को घरों में स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम को अनिवार्य करने का प्रस्ताव भेज दिया है। इसके अलावा, आपातकालीन स्थितियों में तेजी से प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए जीपीएस-इनेबल्ड फायर डिपार्टमेंट ऐप विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
दक्षिणी दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र में एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने तीन लोगों की जान ले ली, जबकि कई अन्य लोग घायल हो गए। इस घटना के बाद दिल्ली फायर सर्विस ने आग से सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया है। दिल्ली फायर सर्विस के चीफ फायर ऑफिसर एके मलिक ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग ने घरों में स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव तैयार किया और फिर सरकार को भेज दिया।
एके मलिक ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा कि 11-12 जून की रात करीब 2:25 बजे फायर कंट्रोल रूम को तुगलकाबाद स्थित एक इमारत में आग लगने की सूचना मिली। एक साथ कई कॉल प्राप्त होने के बाद स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तुरंत आठ फायर टेंडर और एक असिस्टेंट डिविजनल ऑफिसर को मौके पर भेजा गया। उन्होंने बताया कि यह ग्राउंड फ्लोर सहित पांच मंजिला इमारत थी, जिसमें आग लगने की शुरुआत भूतल से हुई थी। आग और घने धुएं के कारण ऊपरी मंजिलों पर मौजूद कई लोग इमारत में फंस गए थे।
फायर सर्विस की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए राहत एवं बचाव अभियान चलाया और आठ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। हालांकि, इस हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य घायल हुए हैं और उनका इलाज जारी है। अधिकारियों के अनुसार, समय पर बचाव अभियान नहीं चलाया जाता तो हताहतों की संख्या और अधिक हो सकती थी।
एके मलिक ने कहा कि उत्तर भारत में गर्मियों के दौरान अत्यधिक तापमान और कम नमी के कारण आग लगने की घटनाओं का जोखिम बढ़ जाता है। लोग लंबे समय तक एयर कंडीशनर और अन्य विद्युत उपकरणों का उपयोग करते हैं, लेकिन उनके रखरखाव पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। इससे बिजली का लोड बढ़ जाता है और कई बार घरेलू वायरिंग तथा सर्किट सुरक्षा प्रणाली प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पाती। परिणामस्वरूप, ओवरलोडिंग और शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याएं पैदा होती हैं, जो आग लगने का कारण बन सकती हैं।
चीफ फायर ऑफिसर ने कहा कि आग की घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली फायर सर्विस ने राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव में आवासीय भवनों में स्प्रिंकलर सिस्टम को अनिवार्य बनाने की सिफारिश की गई है। उन्होंने कहा कि यदि घरों और इमारतों में स्प्रिंकलर लगाए जाएं तो आग से होने वाली क्षति और दुर्घटनाओं में 97 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में ऐसी व्यवस्थाएं पहले से लागू हैं और इससे जनहानि को काफी हद तक रोका जा सकता है।
एके मलिक ने बताया कि विभाग जीपीएस-इनेबल्ड फायर डिपार्टमेंट ऐप विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में फायर टेंडरों की तैनाती और संचालन की प्रक्रिया काफी हद तक मैनुअल सिस्टम पर आधारित है। नए डिजिटल सिस्टम के तहत जैसे ही कोई व्यक्ति आग लगने की सूचना देगा, उसकी लोकेशन स्वतः सिस्टम में दर्ज हो जाएगी। इसके बाद सॉफ्टवेयर आसपास उपलब्ध फायर टेंडरों की पहचान कर उन्हें तुरंत मौके के लिए रवाना करेगा।
उन्होंने बताया कि इस नई व्यवस्था में सभी फायर टेंडरों की जीपीएस ट्रैकिंग की जाएगी, जिससे उनकी वास्तविक समय में निगरानी संभव होगी। साथ ही, सूचना देने वाले व्यक्ति को भी ऐप के माध्यम से यह जानकारी मिल सकेगी कि फायर टेंडर कहां तक पहुंचा है और कितने समय में घटनास्थल पर पहुंचेगा।
एके मलिक ने कहा, इस तकनीक के लागू होने से फायर सर्विस के देर से पहुंचने संबंधी शिकायतों और आरोपों में कमी आएगी तथा आपातकालीन सेवाओं की दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और जल्द ही इसे लागू करने की दिशा में आगे बढ़ा जाएगा।
--आईएएनएस
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