देहरादून, 27 जुलाई (आईएएनएस)। सावन के पावन महीने में उत्तराखंड के प्रसिद्ध टपकेश्वर महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुबह से ही भक्त भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। श्रद्धालु व्रत रखकर, सात्विक भोजन ग्रहण कर और विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना कर रहे हैं। मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से गूंज रहा है।
दिगंबर श्री भरत गिरी जी महाराज ने सावन मास के धार्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय है। उन्होंने कहा कि जो श्रद्धालु पूरे सावन मास में भगवान शिव का पूजन, व्रत और उपासना करते हैं, उन्हें तामसिक वस्तुओं और मदिरा का सेवन नहीं करना चाहिए। इस अवधि में सात्विक भोजन करना चाहिए और यथासंभव दिन में एक बार ही भोजन करना चाहिए। सात्विक जीवनशैली अपनाने से मन और शरीर दोनों संतुलित रहते हैं। इससे मानसिक शांति मिलती है और व्यक्ति पूरे मन से भक्ति, उपासना और पूजा कर पाता है। उन्होंने कहा कि यही संदेश सभी भक्तों के लिए है।
भरत गिरी जी महाराज ने कहा कि सावन मास पूरे भारतवर्ष में अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है। देश का शायद ही कोई शिवालय ऐसा होगा, जहां इन दिनों भक्तों की भीड़ न हो और भगवान शिव को जल अर्पित न किया जा रहा हो। धार्मिक मान्यता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सावन के महीने में भगवान शिव प्रसन्न मुद्रा में रहते हैं और सभी देवी-देवता भी उनके समीप विराजमान रहते हैं। इसी कारण इस पूरे महीने शिव आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। इस पावन मास में जो भी श्रद्धालु भगवान शिव के समक्ष अपनी समस्याएं और मनोकामनाएं रखते हैं, उनकी प्रार्थनाएं अवश्य सुनी जाती हैं। उन्होंने इसे धार्मिक आस्था से जोड़ते हुए कहा कि सावन का महीना भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का अवसर माना जाता है।
दिगंबर श्री भरत गिरी जी महाराज ने बताया कि श्रद्धालु भगवान शिव को भांग, धतूरा, बेलपत्र, दही, दूध और जल अर्पित कर रुद्राभिषेक कर रहे हैं और भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि टपकेश्वर महादेव मंदिर का विशेष धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्राचीन काल में यहां देवताओं, ऋषियों और महर्षि द्रोणाचार्य ने तपस्या की थी। मान्यता है कि द्रोणाचार्य और माता कृपी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया था और यहीं अश्वत्थामा का जन्म हुआ था। इसी कारण बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए टपकेश्वर महादेव मंदिर पहुंचते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान शिव श्रद्धालुओं की इच्छाएं पूर्ण करते हैं।
सावन के अवसर पर आयोजित होने वाली भव्य शोभायात्रा की तैयारियों का उल्लेख करते हुए भरत गिरी जी महाराज ने बताया कि टपकेश्वर महादेव सेवा दल इसकी तैयारियों में पूरी निष्ठा से जुटा हुआ है। उन्होंने कहा कि शोभायात्रा के दौरान पूरा देहरादून नगर सजाया जाएगा और भगवान शिव की भव्य यात्रा निकाली जाएगी। इस अवसर पर लगभग 21 हजार श्रद्धालुओं के लिए विशाल भंडारे का भी आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं से उन्होंने अपील की कि सावन मास में अपने निकट के शिवालय में प्रतिदिन भगवान शिव को जल अर्पित करें और यदि संभव हो तो टपकेश्वर महादेव मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना करें। उन्होंने श्रद्धालुओं से शोभायात्रा और भंडारे में सहयोग करने और इस धार्मिक आयोजन में सहभागी बनने का भी आग्रह किया।
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