नई दिल्ली, 30 जुलाई (आईएएनएस)। तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके विधायक वी. सेंथिल बालाजी ने मद्रास हाई कोर्ट के एक आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। ये हाई कोर्ट का वह आदेश है, जिसमें तमिलनाडु स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन (टैस्माक) के कामकाज में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के आरोपों वाले डीवीएसी मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी।
वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने गुरुवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने बालाजी की विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।
अनुरोध को स्वीकार करते हुए सीजेआई कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मामले को शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति व्यक्त की, बशर्ते कि कोई कमी हो तो उसे दूर कर लिया जाए।
मद्रास हाई कोर्ट द्वारा गुरुवार को डीवीएसी मामले में गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इनकार करने के बाद बालाजी ने शीर्ष अदालत का रुख किया है।
अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस जीके इलांथिरैयन की एकल-न्यायाधीश बेंच ने कहा कि आरोपों की प्रकृति को देखते हुए हिरासत में पूछताछ जरूरी है और यह भी कहा कि मामले में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप शामिल हैं।
हाई कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर भी ध्यान दिया कि आरोपियों ने कथित तौर पर अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग किया, आपराधिक साजिश रची और सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया।
यह मामला 28 जुलाई को डीवीएसी द्वारा बालाजी और कई अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। यह मामला 2021 से 2025 के बीच टैस्माक में कथित अनियमितताओं से संबंधित है, जब बालाजी बिजली, निषेध और आबकारी मंत्री थे।
एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं का इस्तेमाल किया गया है। इनमें आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी, रिकॉर्ड में हेरफेर और भ्रष्टाचार से जुड़े अपराध शामिल हैं।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, बालाजी ने छह अन्य लोगों के साथ मिलकर साजिश रची। इन लोगों में निजी व्यक्ति, डिस्टिलरी और ब्रुअरी कंपनियां, ट्रांसपोर्ट कॉन्ट्रैक्टर, बॉटलिंग कंपनियां और अज्ञात टीएएसएमएसी अधिकारी शामिल थे। उन्होंने आधिकारिक प्रक्रियाओं में हेरफेर की, सार्वजनिक धन का गबन किया और अवैध पैसे को सफेद करने (मनी लॉन्ड्रिंग) में मदद की, जिससे राज्य को भारी नुकसान हुआ।
मद्रास हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत की मांग करते हुए बालाजी ने आरोपों से इनकार किया। उन्होंने दलील दी कि एफआईआर अस्पष्ट और सामान्य आरोपों पर आधारित है, जिसमें किसी खास टेंडर, कॉन्ट्रैक्ट या लेन-देन का जिक्र नहीं है जो उन्हें कथित अपराधों से जोड़ता हो।
उन्होंने आगे दावा किया कि यह मामला राजनीतिक कारणों से प्रेरित था और करूर भगदड़ विवाद के बाद सत्ताधारी पार्टी की दुश्मनी की वजह से दर्ज किया गया था।
--आईएएनएस
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