अगरतला, 23 जून (आईएएनएस)। त्रिपुरा के कृषि और किसान कल्याण मंत्री रतन लाल नाथ ने मंगलवार को कहा कि राज्य का कृषि और किसान कल्याण विभाग सूखे जैसी किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है, हालांकि राज्य में ऐसी स्थिति आने की संभावना कम है क्योंकि इस मौसम में पहले ही 1,000 मिमी से ज्यादा बारिश हो चुकी है।
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लेने के बाद मंत्री ने यह बयान दिया। इस साल अल-नीनो की संभावना और कमजोर या अनिश्चित मॉनसून को देखते हुए, केंद्र सरकार ने खरीफ सीजन के लिए अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री चौहान ने देश भर की स्थिति की समीक्षा करने के लिए राज्यों के कृषि मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों, जिला कलेक्टरों और आईसीएआर, आईसीएआर-सीआआईडीए और भारत मौसम विज्ञान विभाग के विशेषज्ञों के साथ एक उच्च-स्तरीय वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए नाथ ने कहा कि देश भर के कृषि मंत्रियों, सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने मौजूदा कृषि सीजन के दौरान मौसम से जुड़ी संभावित चुनौतियों के लिए तैयारियों की समीक्षा की।
नाथ ने कहा, "हमारे केंद्रीय कृषि मंत्री बहुत सक्रिय और तत्पर हैं। हालांकि भारत ने धान और गेहूं जैसे खाद्यान्न, साथ ही मछली और कई अन्य कृषि उत्पादों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल कर ली है, लेकिन अल-नीनो के असर के कारण देश के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, उन्होंने पहले से ही उपाय किए हैं और सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों को सतर्क कर दिया है। इसीलिए आज समीक्षा बैठक बुलाई गई थी।"
उन्होंने कहा कि त्रिपुरा में सूखे की संभावना बहुत कम है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के पूर्वानुमान और आकलन के अनुसार, त्रिपुरा सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के सामान्य से अधिक रहने की उम्मीद है।
नाथ ने कहा, "हमारे राज्य में पहले ही 1,000 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की जा चुकी है। इसलिए, त्रिपुरा में सूखे की स्थिति की लगभग कोई संभावना नहीं है। हालांकि, अगर कोई अप्रत्याशित स्थिति पैदा होती है, तो हम उससे निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।"
मंत्री ने आगे कहा कि कृषि विभाग को खरीफ फसलों की अधिक उत्पादकता सुनिश्चित करने के लिए एहतियाती उपाय करने का निर्देश दिया गया है। इनमें राज्य भर के किसानों को अच्छी गुणवत्ता वाले बीज, रासायनिक उर्वरक और स्प्रेयर जैसे कृषि उपकरण समय पर उपलब्ध कराना शामिल है।
नाथ ने कहा, "कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए, धान, तिलहन और दालों जैसी खरीफ फसलों की खेती क्लस्टर में की जानी चाहिए ताकि सामुदायिक स्तर पर रोपाई और बुवाई को बढ़ावा दिया जा सके। इस तरह के दृष्टिकोण से उत्पादकता में सुधार करने और कृषि गतिविधियों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी।"
उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर जीवन-रक्षक सिंचाई सहायता प्रदान करने के लिए सिंचाई सुविधाएं तैयार की जा रही हैं और राज्य सरकार ने कृषि उत्पादन की सुरक्षा के लिए आपातकालीन उपाय किए हैं। नाथ ने कहा, "हमारी सरकार किसी भी तरह की मुश्किल स्थिति से निपटने और यह पक्का करने के लिए पूरी तरह तैयार है कि फसल के मौसम में किसानों को कोई परेशानी न हो।"
--आईएएनएस
एससीएच






