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तमिलनाडु: मक्का और पूरक आहार की बढ़ती कीमतों से संकट में नमक्कल के मुर्गीपालक

तमिलनाडु:

कोयंबटूर, 31 अगस्त (आईएएनएस)। एथेनॉल निर्माताओं से मक्के की बढ़ती मांग ने मुर्गी पालन के चारे की लागत में भारी वृद्धि की है, जिससे देश के प्रमुख अंडा उत्पादन केंद्रों में से एक नमक्कल के मुर्गी पालकों पर गंभीर वित्तीय दबाव पड़ रहा है।

मुर्गीपालन में इस्तेमाल होने वाले मुख्य घटक मक्का की कीमत अब लगभग 30 रुपये प्रति किलोग्राम है, जबकि एक साल पहले यह 22 रुपये थी। मुर्गीपालक इस वृद्धि का मुख्य कारण मक्का की अधिक मात्रा का एथेनॉल उत्पादन में उपयोग होना मानते हैं।

हालांकि, यह लगभग दो साल पहले शुरू हुई थी। लेकिन, खबरों के अनुसार इस साल एथेनॉल संयंत्रों को आपूर्ति की जाने वाली मात्रा में काफी वृद्धि हुई है।

मुर्गी पालन क्षेत्र में अभी तक किसी गंभीर कमी का सामना नहीं करना पड़ा है। लेकिन, किसानों को डर है कि अगर एथेनॉल निर्माता अधिक मात्रा में मक्का खरीदना जारी रखते हैं, तो आपूर्ति पर दबाव पड़ सकता है।

नमक्कल का मुर्गी पालन उद्योग उत्तर प्रदेश, बिहार और कर्नाटक से आयातित मक्के पर काफी हद तक निर्भर है। किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ व्यापारी जानबूझकर बाजार में माल रोक रहे हैं, ताकि कृत्रिम कमी पैदा करके कीमतें बढ़ाई जा सकें।

यह संकट केवल मक्का तक ही सीमित नहीं है। मुर्गीपालन के चारे के लिए आवश्यक कई अन्य सामग्रियों और पूरक पदार्थों की कीमतों में पिछले एक वर्ष में भारी वृद्धि हुई है।

सोया, जिसकी कीमत पहले लगभग 30 रुपये प्रति किलो थी, अब 60 रुपये या उससे अधिक में बिक रहा है। पोल्ट्री पोषण में इस्तेमाल होने वाला आयातित खनिज फास्फोरस की कीमत में तीन गुना वृद्धि हुई है, जो लगभग 30 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 90 रुपये हो गई है। पोल्ट्री फीड में मिलाए जाने वाले आवश्यक अमीनो एसिड लाइसिन और मेथियोनीन की कीमतें लगभग 150 रुपये प्रति किलो से बढ़कर लगभग 800 रुपये हो गई हैं।

इन पशु आहार सप्लीमेंट्स का एक बड़ा हिस्सा चीन से आयात किया जाता है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इस वृद्धि का कारण खाड़ी युद्ध से संबंधित व्यवधानों के कारण बढ़ी हुई माल ढुलाई और परिवहन लागत को बताया है।

इनपुट पर होने वाले खर्च में वृद्धि के बावजूद किसान अंडे और ब्रॉयलर चिकन के लिए लाभकारी मूल्य प्राप्त करने में असमर्थ रहे हैं।

वर्तमान में एक अंडे का फार्म-गेट मूल्य लगभग 5.20 रुपये है, जबकि इसकी अनुमानित उत्पादन लागत लगभग 5.50 रुपये है। इसका मतलब है कि मुर्गीपालक प्रत्येक अंडे की बिक्री पर लगभग 30 पैसे का नुकसान उठा रहे हैं।

ब्रॉयलर उत्पादकों को और भी अधिक नुकसान हो रहा है। ब्रॉयलर चिकन का फार्म-गेट मूल्य लगभग 80 रुपये प्रति किलोग्राम है, जो अनुमानित उत्पादन लागत 110 रुपये से काफी कम है।

श्रावण माह के दौरान अंडों की मांग कमजोर बनी रही, क्योंकि इस दौरान कई उपभोक्ता मांसाहारी भोजन से परहेज करते हैं। मुर्गीपालकों को उम्मीद है कि सर्दियों के आने के साथ खपत और कीमतों में सुधार होगा, लेकिन चारे की लागत में लगातार वृद्धि से इस क्षेत्र का वित्तीय संकट और बढ़ सकता है।

--आईएएनएस

एसएचके/एएस