चेन्नई, 27 अगस्त (आईएएनएस)। बाढ़ प्रभावित नेपाल में फंसे तमिलनाडु के 37 तीर्थयात्रियों का अब तक कोई स्पष्ट पता नहीं चल सका है। गुरुवार को तमिलनाडु विधानसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर सदस्यों ने सरकार से लापता श्रद्धालुओं की खोज और बचाव प्रयासों पर विस्तृत जानकारी देने की मांग की।
वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट 5 अगस्त को विधानसभा में पेश किया गया था, जबकि 6 अगस्त को कृषि बजट प्रस्तुत किया गया। 7, 10 और 11 अगस्त को दोनों बजटों पर चर्चा हुई, जिसके बाद 12 अगस्त को वित्त मंत्री मारिया विल्सन और कृषि मंत्री विनोद ने जवाब दिया।
विभागवार अनुदान मांगों पर चर्चा 17 अगस्त से शुरू हुई। अब तक 27 विभागों से संबंधित चर्चाएं पूरी हो चुकी हैं। मिलाद-उन-नबी के अवसर पर बुधवार को सदन की कार्यवाही स्थगित रहने के बाद गुरुवार सुबह 9:30 बजे विधानसभा की बैठक फिर शुरू हुई।
यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण रही क्योंकि टीवीके सरकार के सत्ता में आने के बाद पहली बार प्रश्नकाल आयोजित किया गया। इस दौरान नेपाल में फंसे तमिलनाडु के तीर्थयात्रियों का मुद्दा प्रमुखता से उठा और सदस्यों ने संकट की वास्तविक स्थिति तथा राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर स्पष्ट जानकारी मांगी।
विधायकों ने सवाल उठाया कि क्या बचाव अभियान के समन्वय के लिए किसी विशेष अधिकारी की नियुक्ति की गई है। उन्होंने यह भी जानना चाहा कि तमिलनाडु सरकार द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबरों पर अब तक कितने कॉल प्राप्त हुए हैं, राज्य के कितने लोग अभी भी नेपाल में फंसे हुए हैं और क्या अधिकारियों का उनसे संपर्क हो पाया है।
सदन में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश शिवगणनम भी कथित रूप से फंसे हुए लोगों में शामिल हैं।
विधायकों ने कहा कि तीर्थयात्रियों के परिजन उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे हैं, जिससे उनकी चिंता बढ़ गई है। उन्होंने सरकार से फंसे लोगों की स्थिति और ठिकाने के बारे में सटीक जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।
नेपाल पर्यटन बोर्ड द्वारा पहले जारी जानकारी के अनुसार, बाढ़ के बाद करीब 500 पर्यटकों से संपर्क नहीं हो पाया था। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 32 सुरक्षाकर्मी शामिल बताए गए थे।
विदेशी नागरिकों में 133 भारतीय और भारतीय मूल के 37 प्रवासी नागरिक शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, फंसे हुए भारतीयों में 57 लोग तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों से थे। ये सभी लोग तंजावुर जिले के कुंभकोणम स्थित निजी टूर ऑपरेटर ‘सुपर यात्रा ट्रैवल्स’ के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे।
सूत्रों के अनुसार, इस समूह के 20 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है, लेकिन शेष 37 तीर्थयात्रियों के बारे में अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। विधानसभा ने उनके बारे में तत्काल स्पष्टीकरण और जारी बचाव अभियान की जानकारी देने की मांग की है।
--आईएएनएस
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