चेन्नई, 1 जुलाई (आईएएनएस)। पीएमके अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने बुधवार को धर्मपुरी जिले के बिलिगुंडलू से ऐतिहासिक शहर पूमपुहार तक राज्यव्यापी जन जागरूकता मार्च का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने कावेरी नदी पर प्रस्तावित 'मेकेदातु बांध परियोजना' के खिलाफ अपनी पार्टी के अभियान को और तेज कर दिया।
मार्च को हरी झंडी दिखाते हुए अंबुमणि ने इस परियोजना को तमिलनाडु की जल सुरक्षा, कृषि और पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बताया और राज्य सरकार से बांध को बनने से रोकने के लिए कानूनी प्रयासों को मजबूत करने का आग्रह किया।
पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य कावेरी डेल्टा और नदी पर निर्भर अन्य क्षेत्रों में प्रस्तावित जलाशय के खिलाफ जनमत जुटाना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक की योजना तमिलनाडु में कावेरी के जल प्रवाह को बुरी तरह प्रभावित करेगी, जिससे सिंचाई, पेयजल आपूर्ति और लाखों लोगों की आजीविका खतरे में पड़ जाएगी।
कावेरी नदी को तमिलनाडु की जीवनरेखा बताते हुए अंबुमणि ने कहा कि राज्य में पांच करोड़ से अधिक लोग कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस नदी पर निर्भर हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मेकेदातु बांध का निर्माण होता है, तो तमिलनाडु को मिलने वाले पानी का पहले से ही सीमित प्रवाह और भी कम हो सकता है, जिससे कई जिलों में जल संकट और भी बढ़ जाएगा।
कर्नाटक के इस तर्क को खारिज करते हुए कि यह परियोजना मुख्य रूप से बेंगलुरु की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए है, अंबुमणि ने कहा कि शहर की जरूरतों को इससे कहीं कम मात्रा में पानी से पूरा किया जा सकता है।
उन्होंने चिंता व्यक्त की कि प्रस्तावित 70 टीएमसी जलाशय का उपयोग अंततः सिंचाई के लिए किया जा सकता है, जिससे कर्नाटक कावेरी के ऊपरी हिस्से में अधिक पानी रोक सकेगा और तमिलनाडु को नीचे की ओर छोड़े जाने वाले पानी पर असर पड़ेगा।
पीएमके नेता ने पर्यावरण संबंधी चिंताएं भी उठाईं और बताया कि प्रस्तावित जलाशय क्षेत्र में लगभग 12,500 एकड़ घना जंगल शामिल है जो हाथियों, बाघों और कई अन्य वन्यजीव प्रजातियों का आवास है।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक के पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने भी इस परियोजना का विरोध किया है और अधिकारियों से पारिस्थितिक आधार पर इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
उन्होंने कर्नाटक की पिछली सरकारों पर कावेरी जल बंटवारे की प्रतिबद्धताओं का पालन न करने का आरोप लगाया। अंबुमणि ने तमिलनाडु सरकार से इस परियोजना को रोकने के लिए हर संभव कानूनी उपाय अपनाने का आह्वान किया।
उन्होंने राज्य सरकार के नए कावेरी न्यायाधिकरण के प्रस्ताव का भी विरोध दोहराया और कहा कि मौजूदा न्यायाधिकरण ढांचा पर्याप्त है।
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