हैदराबाद, 17 जून (आईएएनएस)। तेलंगाना के सिद्दिपेट जिले के एक पुलिस स्टेशन में एक बकरी की बेरहमी से हत्या के मामले में एफआईआर दर्ज की गई है।
पेटा इंडिया ने बुधवार को कहा कि सिद्दिपेट ज़िले के खाजीपुर गांव में पेड्डाम्मा बोनालु उत्सव के दौरान एक बकरी की गैरकानूनी और बेरहमी से हत्या का वीडियो मिलने के बाद उन्होंने एफआईआर दर्ज कराने के लिए 'स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया' के अडुलापुरम गौतम, सिद्दिपेट के पुलिस कमिश्नर और भूमपल्ली पुलिस स्टेशन के साथ मिलकर काम किया।
खुलेआम की गई इस बलि का एक वीडियो इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया गया था। फुटेज में कुछ लोग बकरी के पैर पकड़े हुए दिख रहे हैं जबकि एक अन्य व्यक्ति की ओर से बार-बार उसके गर्दन पर वार किया जा रहा है।
'स्ट्रे एनिमल फाउंडेशन इंडिया' की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए, भूमपल्ली पुलिस स्टेशन ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 325 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए) 1960 की धारा 11(1) के तहत एफआईआर दर्ज की।
पेटा इंडिया ने पुलिस से आग्रह किया है कि वे एफआईआर में 'तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950' की धाराओं को भी शामिल करें।
पेटा इंडिया की 'लीड क्रुएल्टी रिस्पॉन्स कोऑर्डिनेटर' श्रीकुट्टी राजे ने कहा कि पेटा इंडिया सिद्दिपेट पुलिस, खासकर पुलिस कमिश्नर रश्मि पेरुमल (आईपीएस) की तारीफ करता है। उन्होंने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देकर और यह संदेश देकर कि जानवरों के प्रति क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, सराहनीय कदम उठाया है।
उन्होंने कहा कि जानवरों की बलि न केवल क्रूरता है, बल्कि समाज के लिए भी खतरा है। यह लोगों को हिंसा के प्रति असंवेदनशील बनाती है और ऐसी पुरानी मान्यताओं को बढ़ावा देती है जो तरक्की में बाधा डालती हैं। जिस तरह इंसानी बलि को अब हत्या माना जाता है, उसी तरह ऐसे समय में जब भारत अंतरिक्ष मिशन शुरू कर रहा है और एआई समिट आयोजित कर रहा है, जानवरों की बलि की पुरानी प्रथा को खत्म होना चाहिए। यह हमारे सामाजिक विकास के लिए जरूरी है।
शिकायत में बताया गया कि तेलंगाना पशु और पक्षी बलि निषेध अधिनियम, 1950 के प्रावधानों के अनुसार, राज्य में सार्वजनिक धार्मिक स्थलों पर जानवरों और पक्षियों की बलि पूरी तरह प्रतिबंधित है। इस अधिनियम की धारा 3 के तहत किसी भी सार्वजनिक मंदिर, पूजा स्थल या उसके परिसर में तथा सार्वजनिक सड़कों पर किसी भी धार्मिक पूजा, सभा या जुलूस के दौरान पशु या पक्षी की बलि देना सख्ती से वर्जित है।
धारा 4 में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी व्यक्ति खुद बलि नहीं दे सकता, न ही दूसरों को बलि देने के लिए कह सकता है, न मदद कर सकता है और न ही बलि में किसी भी रूप में हिस्सा ले सकता है।
धारा 5 के अंतर्गत मंदिर या पूजा स्थल के प्रबंधन/कब्जे वाले व्यक्ति (ट्रस्टी, पुजारी या कमिटी) को भी अपने परिसर में बलि होने की अनुमति देने की मनाही है।
--आईएएनएस
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