हैदराबाद, 16 जुलाई (आईएएनएस)। तेलंगाना प्रदेश कांग्रेस कमेटी (टीपीसीसी) ने पार्टी कार्यक्रमों के दौरान नेताओं के दूध और जलाभिषेक पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही नेताओं को जेसीबी, बुलडोजर या अन्य भारी मशीनों की मदद से विशाल मालाएं पहनाने की प्रथा पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने पार्टी कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि किसी भी अवसर या स्थान पर आयोजित कांग्रेस के कार्यक्रमों में 'पालाभिषेकम' (दूधाभिषेक) और 'जलाभिषेकम' नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियां कांग्रेस की विचारधारा और सिद्धांतों के खिलाफ हैं।
उन्होंने चेतावनी दी कि पार्टी के इस निर्देश का उल्लंघन करने वाले नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
टीपीसीसी के उपाध्यक्ष टी. कुमार राव ने गुरुवार को इस संबंध में एक परिपत्र जारी किया। इसमें बताया गया कि यह निर्णय अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की तेलंगाना प्रभारी मीनाक्षी नटराजन के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है।
परिपत्र में कहा गया है कि पार्टी का प्रत्येक पदाधिकारी इन निर्देशों का पालन करने के लिए बाध्य होगा।
कांग्रेस ने अपने निर्देश में कहा है कि दूध और पानी से अभिषेक जैसी परंपराएं पार्टी की विचारधारा के पूरी तरह विपरीत हैं, क्योंकि इससे खाद्य पदार्थों की बर्बादी होती है। ऐसे समय में जब समाज का एक बड़ा वर्ग कुपोषण जैसी समस्याओं से जूझ रहा है, इस तरह की गतिविधियां उचित नहीं हैं।
पार्टी ने सुझाव दिया है कि कार्यकर्ता दूध या अन्य खाद्य सामग्री का उपयोग अभिषेक के बजाय जरूरतमंद लोगों में खाद्य सामग्री वितरित करने के लिए करें।
टीपीसीसी ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में वरिष्ठ नेताओं के राज्यभर के दौरों के दौरान कुछ कार्यकर्ता जेसीबी, बुलडोजर और अन्य भारी मशीनों की मदद से नेताओं को विशाल मालाएं पहनाते रहे हैं।
पार्टी ने इस पर भी पूरी तरह रोक लगा दी है। परिपत्र में कहा गया है कि जेसीबी और बुलडोजर जैसे वाहन दमन के प्रतीक माने जाते हैं, इसलिए अब इनका उपयोग नेताओं को माला पहनाने के लिए नहीं किया जाएगा। ऐसा करने पर भी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि तेलंगाना में विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता नेताओं की जयंती, महत्वपूर्ण घोषणाओं या अन्य विशेष अवसरों पर उनके चित्रों और प्रतिमाओं का दूध और पानी से अभिषेक करते हैं। वहीं, रैलियों और सार्वजनिक सभाओं में जेसीबी या बुलडोजर की मदद से नेताओं को बड़ी मालाएं पहनाने की परंपरा भी लंबे समय से चली आ रही है।
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