शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों की मान्यता पर सियासी घमासान, संजय निरुपम बोले- उद्धव ठाकरे की पार्टी खत्म हो रही है

शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों की मान्यता पर सियासी घमासान, संजय निरुपम बोले- उद्धव ठाकरे की पार्टी खत्म हो रही है

नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उद्धव ठाकरे गुट के 6 बागी सांसदों को शिंदे गुट की शिवसेना में मान्यता दे दी है। अब ये छह सांसद शिंदे गुट की शिवसेना के साथ संसद में बैठेंगे। यह फैसला संसद के नियमों, परंपराओं और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार लिया गया है। स्पीकर के इस आदेश के बाद अब इन सांसदों को उद्धव ठाकरे गुट (यूबीटी) के बजाय शिंदे गुट की शिवसेना के आधिकारिक सदस्य माना जाएगा।

स्पीकर की ओर से बागी सांसदों को मान्यता दिए जाने पर शिवसेना नेता संजय निरुपम ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने यह साफ कर दिया है कि यूबीटी के 6 सांसद हमारी पार्टी शिवसेना में शामिल हो गए हैं। स्पीकर के आदेश से स्पष्ट हो गया है कि यह संवैधानिक व्यवस्था के ढांचे के अंदर किया गया फैसला है। इन छह सांसदों ने किसी भी तरह का गैरकानूनी कदम नहीं उठाया था। कानून उन्हें अधिकार देता है कि वे दो-तिहाई बहुमत के साथ किसी भी पार्टी में शामिल हो सकते हैं।

उद्धव ठाकरे पर तीखा हमला करते हुए संजय निरुपम ने कहा कि उद्धव ठाकरे और उनका पूरा ग्रुप कल राम रक्षा स्तोत्र पढ़ने के बहाने यहां आए थे। उनका असली इंटरेस्ट राम रक्षा में नहीं है। जनता का उनकी पार्टी से भरोसा उठ गया है। उनकी पार्टी लगातार सिकुड़ रही है, टूट रही है और खत्म हो रही है। इसलिए वे सिर्फ अपनी पार्टी बचाने के लिए राम रक्षा स्तोत्र पढ़ रहे हैं।

निरुपम ने कहा कि 2019 में जब उन्होंने कांग्रेस से हाथ मिलाने के लिए शिवसेना की मूल विचारधारा (हिंदुत्व) छोड़ दी, तब उन्होंने भगवान राम से अपना कनेक्शन तोड़ लिया था। अब जब उनकी पूरी पार्टी टूट रही है, तो वे राम का नाम ले रहे हैं। राम के दुश्मनों के साथ जुड़कर राम रक्षा स्तोत्र पढ़ना वैसा ही है जैसे रावण राम की तारीफ में श्लोक पढ़े।

भाजपा विधायक राम कदम ने कहा कि लोकसभा स्पीकर ने संविधान के तहत और संसद की परंपराओं व नियमों के अनुसार फैसला लिया है। दो-तिहाई बहुमत के आधार पर यूबीटी गुट के छह सांसदों को असली शिवसेना के आधिकारिक सदस्य के रूप में मान्यता दी गई है। उनके लिए अलग से बैठने की व्यवस्था भी की गई है। स्पीकर ने टीएमसी के 20 सांसदों के मामले में भी इसी तरह का फैसला लिया था। यह पूरी तरह से पार्लियामेंट के नियमों को ध्यान में रखकर लिया गया फैसला है।

शिवसेना नेता शाइना एनसी ने कहा कि संविधान दो-तिहाई सांसदों को अलग होने की मान्यता देता है। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने उसी प्रावधान को माना है। हमारे नेता एकनाथ शिंदे ने हमेशा प्रगतिशील राजनीति की है। उद्धव ठाकरे की शिवसेना को यह सोचना चाहिए कि उनके नेता और कार्यकर्ता हमारी पार्टी में क्यों शामिल हो रहे हैं।

मानसून सत्र पर शाइना एनसी ने कहा कि अगर लोग चर्चा करना चाहते हैं तो उन्हें संसद के अंदर करनी चाहिए, बाहर नहीं। डिलिमिटेशन और जनगणना एक सतत प्रक्रिया है। एक स्वतंत्र डिलिमिटेशन आयोग है, जिसमें चुनाव आयुक्त, सुप्रीम कोर्ट के जज और राज्य चुनाव आयुक्त शामिल होते हैं। इसी तरह एसआईआर भी एक समीक्षा प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य फर्जी वोटरों को हटाना और अवैध घुसपैठियों को रोकना है। जनगणना समय-समय पर होती रहती है तो इसे क्यों रोका जा रहा है? रुकावट की राजनीति क्यों की जा रही है?

शिवसेना नेता मिलिंद देवड़ा ने कहा कि सत्र से एक दिन पहले ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई जाती है। पहली बार मैं देख रहा हूं कि कुछ विपक्षी पार्टियों ने वॉकआउट किया। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। संसद का सुचारू संचालन सिर्फ सत्तापक्ष की नहीं, बल्कि विपक्ष की भी जिम्मेदारी है।

--आईएएनएस

डीकेएम/वीसी