संविधान की रक्षा प्रतिदिन की जानी चाहिए, न कि केवल साल में एक बार याद की जानी चाहिए: राजीव चंद्रशेखर

संविधान की रक्षा प्रतिदिन की जानी चाहिए, न कि केवल साल में एक बार याद की जानी चाहिए: राजीव चंद्रशेखर

तिरुवनंतपुरम, 26 जून (आईएएनएस)। केरल भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को 1975 के आपातकाल की वर्षगांठ पर संविधान की रक्षा के लिए निरंतर सतर्कता बरतने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इसकी रक्षा प्रत्येक नागरिक की सामूहिक जिम्मेदारी है, न कि केवल राजनीतिक दलों या सरकारों की।

राजीव चंद्रशेखर ने आपातकाल की वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को भी संबोधित किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लगभग पांच दशक पहले कांग्रेस सरकार द्वारा लगाया गया आपातकाल भारत के संवैधानिक ढांचे और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर सबसे गंभीर हमलों में से एक था।

उन्होंने दावा किया कि उस दौरान उठाए गए कदम राष्ट्रीय सुरक्षा की रक्षा या राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाने के लिए नहीं, बल्कि एक राजनीतिक दल और एक राजनीतिक परिवार की रक्षा के लिए थे।

आपातकाल को इतिहास का एक अध्याय मात्र न बताते हुए भाजपा नेता ने कहा कि यह लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक सुरक्षा उपायों को संरक्षित करने के महत्व की याद दिलाता है।

उन्होंने कहा कि जो इतिहास से सबक नहीं सीखते, वे उसे दोहराने के लिए अभिशप्त होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि यह चेतावनी आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी 1975 में थी।

राजीव चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने आपातकाल के दौरान संविधान द्वारा प्रदत्त मौलिक अधिकारों, विशेष रूप से अनुच्छेद 19 के अंतर्गत निहित स्वतंत्रताओं को दबाने के लिए क्रूर बल का प्रयोग किया था।

उन्होंने कहा कि उस दौरान नागरिक स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के प्रयासों ने नागरिकों को संवैधानिक अधिकारों के किसी भी हनन के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता को रेखांकित किया।

समकालीन मुद्दों से तुलना करते हुए उन्होंने अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन के अधिकार और संपत्ति अधिकारों से संबंधित उभरते मुद्दों पर चिंता व्यक्त की।

वक्फ मुद्दे पर चल रही बहस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि संपत्ति से संबंधित संवैधानिक सुरक्षा का बिना किसी समझौते के पालन किया जाना चाहिए।

उन्होंने मीडिया की स्वतंत्रता में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के संचालन के लिए स्वतंत्र प्रेस अपरिहार्य है।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने आगे दावा किया कि जिन संगठनों ने खुले तौर पर भारतीय संविधान पर सवाल उठाए थे या उसे खारिज किया था, वे आज मुख्यधारा की राजनीति और सत्ता के पदों पर आसीन हो गए हैं।

नागरिकों से संवैधानिक मूल्यों को एक साझा राष्ट्रीय दायित्व मानने का आह्वान करते हुए राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि आपातकाल की वर्षगांठ साल में एक बार मनाना पर्याप्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि संविधान, लोकतंत्र और राष्ट्र के मूलभूत सिद्धांतों की रक्षा केवल प्रतिदिन सतर्कता और प्रतिबद्धता के माध्यम से ही की जा सकती है।

--आईएएनएस

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