सीमा सुरक्षा पर भारत मजबूत, सेना किसी भी चुनौती का जवाब देने को तैयार: रक्षा विशेषज्ञ कर्नल चीमा

सीमा सुरक्षा पर भारत मजबूत, सेना किसी भी चुनौती का जवाब देने को तैयार: रक्षा विशेषज्ञ कर्नल चीमा

चंडीगढ़, 30 जून (आईएएनएस)। भारतीय सेना के प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी सेवानिवृत्त हो गए हैं। मंगलवार को अपने सेवानिवृत्त समारोह में उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों के दौरान सेना ने उत्तरी सीमाओं पर ऑपरेशन स्नो लेपर्ड और पश्चिमी मोर्चे पर ऑपरेशन सिंधु के तहत व्यापक तैयारियां की हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य के युद्ध संयुक्त और एकीकृत सैन्य अभियानों पर आधारित होंगे, इसलिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और स्पष्ट रणनीति बेहद जरूरी है। इस पर डिफेंस एक्सपर्ट कर्नल डी.एस. चीमा (रिटायर्ड) की प्रतिक्रिया सामने आई है।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि सेना प्रमुख के सेवानिवृत्त होने के समय इस तरह का मूल्यांकन और जिम्मेदारियों का हस्तांतरण एक सामान्य प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि जब कोई सेना प्रमुख अपना कार्यकाल पूरा करता है और नया सेना प्रमुख जिम्मेदारी संभालता है, तब पूरे सैन्य ढांचे की तैयारियों और मौजूदा स्थिति की समीक्षा की जाती है।

उन्होंने कहा कि जनरल उपेंद्र द्विवेदी हाल के दिनों में सीमावर्ती क्षेत्रों का लगातार दौरा कर रहे थे। उन्होंने श्रीनगर सहित कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों का निरीक्षण किया और मौजूदा सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। कर्नल चीमा के मुताबिक, जनरल द्विवेदी ने जो दावा किया है कि भारतीय सेना पूरी तरह तैयार है, वह वास्तविक स्थिति के अनुरूप है। भारतीय सेना पूर्वी सीमा और पश्चिमी सीमा दोनों पर पूरी तरह तैयार है।

रक्षा विशेषज्ञ ने कहा कि पूर्वी लद्दाख में भारतीय सेना ने अपनी क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि की है। उन्होंने न्योमा एयरफील्ड का उदाहरण देते हुए कहा कि यह सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है और वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से बहुत कम दूरी पर स्थित है। इस एयरफील्ड के विकसित होने से सेना की त्वरित तैनाती और रसद आपूर्ति की क्षमता पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।

उन्होंने जोजिला सुरंग का भी उल्लेख किया और कहा कि इसके पूरी तरह चालू होने के बाद लद्दाख क्षेत्र तक सालभर निर्बाध पहुंच संभव हो जाएगी। इससे सीमावर्ती इलाकों में सैनिकों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही आसान होगी तथा हर मौसम में सैन्य संचालन को मजबूती मिलेगी।

कर्नल चीमा ने कहा कि भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का आयात करने वाला देश नहीं रहा। पिछले कुछ वर्षों में स्वदेशी रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। आज देश आधुनिक हथियार और सैन्य उपकरण न केवल खुद बना रहा है बल्कि कई देशों को उनका निर्यात भी कर रहा है। उनके अनुसार यह बदलाव भारत की रणनीतिक ताकत को नई ऊंचाई दे रहा है।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि यदि चीन या पाकिस्तान किसी प्रकार की सैन्य आक्रामकता दिखाने की कोशिश करते हैं तो उन्हें पहले भारतीय सेना की तैयारियों और क्षमताओं का गंभीरता से आकलन करना पड़ेगा। उनके अनुसार दोनों सीमाओं पर सेना पूरी तरह सतर्क और हर परिस्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

भविष्य के युद्धों की प्रकृति पर बात करते हुए कर्नल चीमा ने कहा कि आधुनिक युद्ध अब केवल टैंक, तोप और पैदल सेना तक सीमित नहीं रह गए हैं। आने वाले समय में युद्ध पूरी तरह इंटीग्रेटेड यानी संयुक्त सैन्य अभियानों पर आधारित होंगे। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना इसी दिशा में लगातार काम कर रही है और नई तरह की एकीकृत सैन्य संरचनाएं विकसित की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि इन नई संरचनाओं में इन्फैंट्री, आर्मर्ड यूनिट, आर्टिलरी, एयर डिफेंस, इंजीनियरिंग और अन्य सभी आवश्यक सैन्य संसाधनों को एक साथ जोड़ा जाएगा, ताकि किसी भी ऑपरेशन के दौरान अलग-अलग इकाइयों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। इससे युद्ध के मैदान में निर्णय लेने की गति और जवाबी कार्रवाई की क्षमता दोनों बढ़ेंगी।

ड्रोन तकनीक पर विशेष जोर देते हुए कर्नल चीमा ने कहा कि हाल के सैन्य अभियानों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हैं। उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध में निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने, लक्ष्य की पहचान करने और सटीक हमले करने में ड्रोन निर्णायक साबित हो रहे हैं।

उन्होंने बताया कि भारत का रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन इस क्षेत्र में तेजी से काम कर रहा है और देश के पास बड़ी संख्या में ड्रोन निर्माण की क्षमता विकसित हो चुकी है। उनके अनुसार भारत हर महीने हजारों ड्रोन बनाने की क्षमता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जो भविष्य की सुरक्षा जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है।

कर्नल चीमा ने कहा कि आने वाले वर्षों में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा, जहां विभिन्न सैन्य इकाइयां, आधुनिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन और स्वदेशी हथियार एक साथ मिलकर काम करेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय सेना इस बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है और किसी भी चुनौती का प्रभावी जवाब देने में सक्षम है।

--आईएएनएस

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