कोलकाता, 22 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में सुहरावर्दी एवेन्यू रोड का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी कर दिया गया है, जिस पर टीएमसी सांसद सौगत रॉय ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे विवादित कदम बताया।
उन्होंने सोमवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह सुहरावर्दी जिनके नाम पर 1933 से रास्ता था, उन्होंने आजादी के समय हुए दंगों में हिस्सा नहीं लिया था। वो डॉक्टर थे और साथ में कोलकाता यूनिवर्सिटी के वाइस चासंलर भी थे। जिस सुहरावर्दी के बारे में जिक्र किया जा रहा है, वो पश्चिम बंगाल के सीएम रह चुके हैं। अब अचानक से गोपाल मुखर्जी के नाम आगे कर दिया गया है, जिससे विभाजन को बल मिलेगा। गोपाल मुखर्जी एक बाहुबली व्यक्ति थे। वो कांग्रेस के समर्थक थे। अब ऐसा क्यों किया गया, यह कदम हमें सही नहीं लगता है।
उन्होंने पिछले कुछ दिनों से क्षेत्रीय दलों में हो रही फूट को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि बहुत मुमकिन है कि आने वाले दिनों में टूट की यह संभावना अलग-अलग क्षेत्रीय दलों में बढ़ेगी। बीजेपी की तो हमेशा से ही यह रणनीति रही है कि वह लोटस अभियान और ईडी/सीबीआई का डर दिखाकर लोगों को अपने झांसे में लेती है। इस तरह की स्थिति पूरी तरह से लोकतंत्र के खिलाफ है।
वहीं, उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के साथ हुई मुलाकात पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके मुताबिक हमारी ओम बिरला से मुलाकात हुई। उन्होंने पूरे धीरज के साथ हमारी बात सुनी। जो लोग भी पार्टी से निकले हैं, उन्हें दलगत विरोधी कानून के दायरे में लाया जाना चाहिए। हमने इस संबंध में व्यक्तिगत याचिका भी दाखिल की है। जहां मर्जर की बात हो रही है, तो मैं साफ कर देना चाहता हूं कि यह पार्टी टू पार्टी ही मुमकिन है। विधायक और विधायक आपस में कैसे मर्जर कर सकते हैं।
इसके अलावा उन्होंने नीट की परीक्षा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि हमें इस बात की खुशी है कि किसी भी प्रकार का बड़ा स्कैंडल नहीं हुआ। परीक्षा कैंसिल नहीं हुई। यह बच्चों के भविष्य का सवाल है। ऐसी स्थिति में सफलतापूर्वक परीक्षा का होना हमारे लिए खुशी की बात है।
--आईएएनएस
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