राष्ट्रीय हथकरघा दिवस : सांसद मंजू शर्मा ने खरीदी खादी, ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने पर जोर

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस : सांसद मंजू शर्मा ने खरीदी खादी, ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने पर जोर

जयपुर, 7 अगस्त (आईएएनएस)। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के मौके पर जयपुर की सांसद मंजू शर्मा ने नई दिल्ली के खड़क सिंह मार्ग स्थित हैंडलूम हाउस का दौरा किया। उन्होंने खादी और हथकरघा उत्पाद खरीदे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' के विजन को आगे बढ़ाया।

उन्होंने अपने और परिवार के सदस्यों के लिए खादी के कपड़े खरीदे, साथ ही खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र के कई उत्पाद भी खरीदे।

सांसद शर्मा ने कहा कि भारत की हथकरघा परंपरा सिर्फ कपड़ों की कारीगरी नहीं है, बल्कि यह देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आत्मनिर्भरता और लाखों कारीगरों के समर्पण का जीता-जागता प्रतीक है। खादी का हर धागा स्वदेशी की भावना, आत्म-सम्मान और आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाता है।

उन्‍होंने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी की अपील का जिक्र करते हुए कहा कि नागरिकों को हथकरघा और खादी उत्पाद खरीदने की कोशिश करनी चाहिए। यह अपील सिर्फ खरीदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश भर के लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका, सम्मान और आर्थिक भलाई से सीधे जुड़ी हुई है।

मंजू शर्मा ने आगे कहा कि अगर हर घर साल में कुछ मौकों पर भी खादी और हथकरघा उत्पादों को अपनाता है, तो इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा बढ़ावा मिलेगा और भारत के पारंपरिक उद्योगों को मजबूती मिलेगी।

भारतीय हथकरघा उत्पादों को दुनिया भर में मिल रही पहचान का जिक्र करते हुए, शर्मा ने कहा कि उनकी बेहतरीन क्वालिटी, प्राकृतिक कपड़े और पारंपरिक कारीगरी ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अलग पहचान दिलाई है।

उन्होंने हर भारतीय से स्थानीय रूप से बने उत्पादों को प्राथमिकता देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को देशव्यापी आंदोलन बनाने में मदद करने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से त्योहारों, पारिवारिक समारोहों और रोजमर्रा की जिंदगी में खादी और हथकरघा उत्पादों को शामिल करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसे फैसलों से न सिर्फ भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत सुरक्षित रहेगी, बल्कि लाखों बुनकर परिवारों की आजीविका भी मजबूत होगी।

उन्होंने कहा, "आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी सच हो सकता है, जब हर नागरिक सोच-समझकर खरीदारी करके देश के बुनकरों, कारीगरों और स्थानीय उद्योगों को मजबूत बनाए।"

--आईएएनएस

एएसएच/एबीएम