रिश्वत मामले में आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सीबीआई जांच पर उठे सवाल

रिश्वत मामले में आईपीएस अधिकारी की गिरफ्तारी पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी, सीबीआई जांच पर उठे सवाल

चंडीगढ़, 1 जुलाई (आईएएनएस)। नकली दवा बनाने वाले एक बड़े रैकेट की जांच से जुड़े तीन करोड़ रुपए की रिश्वत मामले में गिरफ्तार हरियाणा काडर के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत के मामले पर राउज एवेन्यू कोर्ट ने नाराजगी जताई है। कोर्ट ने सीबीआई की जांच के तरीके पर नाराजगी जताते हुए कहा कि सीबीआई ने यह नहीं बताया है कि इस मामले में ट्रांजेक्शन के किस हिस्से की जांच करनी बाकी है।

कोर्ट ने कहा कि जांच अधिकारी ने यह भी बताया था कि 1 करोड़ का एडवांस अमाउंट दिया गया था और वह रिकवर हो गया है, लेकिन दीपक गहलावत को कोई अमाउंट नहीं दिया गया था, इसलिए बड़ी साजिश का मामला मौजूदा जांच के दायरे से बाहर है और यह दलील पुलिस कस्टडी का आधार नहीं बन सकती।

कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच अधिकारी से पूछे गए सवालों से पता चला कि उसने यह पता लगाने की कोई कोशिश नहीं की कि आरोपी ने किसी व्यक्ति से संपर्क किया था या नहीं। यहां तक कि जांच अधिकारी ने यह पता लगाने की शिश नहीं की कि ऐसा कोई व्यक्ति था भी या नहीं।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में जांच अधिकारी का व्यवहार और जवाब कोर्ट के समझ से बाहर है। इसी के साथ कोर्ट ने पुलिस की तरफ से जमा किए गए दस्तावेज को सामने रखते हुए कहा, लवकुश मिश्रा से बरामद हुए 1,425,000 रुपए, अनुकल्प मिश्र से बरामद हुए 1,682,046 रुपए, अविनाश शुक्ला से 20,39,220 रुपए और 1,121 डॉलर, करुणेश पांडेय से मिले 1,807,063 रुपए, रमाशंकर मिश्रा से मिले 7,32,170 रुपए और रामशंकर यादव टुन्नू से एक लाख रुपए मिले हैं।

बता दें कि यह पूरा मामला नकली दवा बनाने वाले एक बड़े रैकेट की जांच से जुड़ा है, जिसमें तीन करोड़ रुपए की कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार हरियाणा काडर के आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत को राउज एवेन्यू कोर्ट ने एक दिन की सीबीआई कस्टडी में भेजा है।

घूस लेने के आरोप में सीबीआई ने आईपीएस अधिकारी दीपक गहलावत को गिरफ्तार कर राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश किया था और 5 दिनों की कस्टडी मांगी थी। हालांकि, आरोपी आईपीएस अधिकारी के वकील ने कस्टडी का विरोध करते हुए कहा कि वह चार बार पूछताछ में शामिल हुए हैं। हमेशा जांच में सहयोग दिया है और जिस 50 हजार रुपए की राशि आने की बात है, वो अपनी पुरानी कार को बेचने के लिए एडवांस लिया था।

आरोपी आईपीएस अधिकारी के वकील ने दलील दी कि कोई भी अधिकारी अगर घूस लेगा तो क्या वो अपने पर्सनल अकाउंट में लेगा। वहीं, सीबीआई का आरोप है कि डेढ़ करोड़ रुपए मांगे थे तो क्या इतनी बड़ी रकम का एडवांस कोई 50 हजार रुपए लेगा।

सीबीआई ने बताया कि यह गिरफ्तारी नकली दवा बनाने वाले एक बड़े रैकेट की जांच से जुड़े तीन करोड़ रुपए की रिश्वत मामले में हुई है। मामले को लेकर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, अपराध के समय आईपीएस दीपक गहलावत नागर विमानन महानिदेशालय में रीजनल डायरेक्टर (क्षेत्रीय निदेशक) के पद पर तैनात थे।

आरोप है कि उन्होंने इस मोटी रिश्वत के बदले जांच एजेंसी के अधिकारियों पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल करने का दावा किया था। आरोप है कि आईपीएस दीपक गहलावत ने पुडुचेरी के एक व्यवसायी को भरोसा दिलाया था कि वह अपने प्रभाव के जरिए नकली दवा रैकेट की सीबीआई जांच का रुख उसके पक्ष में मोड़ देंगे।

--आईएएनएस

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