नासिक, 8 जून (आईएएनएस)। सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा राम मंदिर के करोड़ों रुपए का चढ़ावा गायब होने के आरोप पर महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने कहा कि हाल के दिनों में मीडिया में चल रही कुछ खबरों की सत्यता पर उन्हें संदेह है। किसी भी राष्ट्रीय या बड़े धार्मिक मंदिर के बारे में बिना प्रमाण के आरोप लगाना उचित नहीं है।
महंत रामकिशोर दास शास्त्री ने कहा कि यदि किसी मठ, मंदिर या धार्मिक ट्रस्ट के दान पात्र या वित्तीय प्रबंधन में कोई गड़बड़ी होती है तो उसकी निष्पक्ष और प्रमाणित जांच होनी चाहिए, लेकिन यदि केवल अफवाहों के आधार पर किसी संस्था या धर्म को बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है तो यह भी गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने यह भी कहा कि सनातन धर्म सभी का है और भारत में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में इस सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा हुआ है। भारत की धार्मिक पहचान और आस्था को कमजोर करने के लिए यदि कोई झूठी खबर या भ्रम फैलाया जाता है तो उसकी जांच और कार्रवाई दोनों जरूरी हैं। साथ ही यदि वास्तव में कोई भ्रष्टाचार या अनियमितता साबित होती है तो दोषियों को कानून के अनुसार कठोर सजा मिलनी चाहिए।
उन्होंने अयोध्या राम मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि विश्व स्तर पर यह एक महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र बन चुका है और करोड़ों श्रद्धालु वहां आस्था के साथ पहुंचते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि ऐसे पवित्र स्थलों की व्यवस्था पर कोई सवाल उठता है तो उसकी जांच पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि जनता का विश्वास बना रहे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि जानबूझकर अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई की जानी चाहिए।
इसी दौरान उन्होंने काशी विश्वनाथ क्षेत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां नगर प्रशासन द्वारा मांस, मछली और अन्य आपत्तिजनक वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने जैसे कदम सराहनीय हैं। उनके अनुसार, ऐसे ही कदम अन्य तीर्थ स्थलों, विशेषकर नासिक और त्र्यंबकेश्वर जैसे पवित्र क्षेत्रों में भी लागू किए जाने चाहिए, ताकि धार्मिक वातावरण शुद्ध और सुरक्षित बना रहे। उन्होंने यह भी कहा कि कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों को देखते हुए प्रशासन को पहले से ही सख्त नियम बनाने चाहिए।
भक्त चरणदास महाराज ने भी राम मंदिर ट्रस्ट और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं पर लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे दावे बिना प्रमाण के हैं और इन्हें राजनीतिक या सामाजिक बदनाम करने की दृष्टि से देखा जा सकता है। उनके अनुसार मंदिर की व्यवस्थाओं में किसी प्रकार की गड़बड़ी की पुष्टि नहीं है, और जो लोग ऐसे आरोप लगा रहे हैं, वे संभवतः राजनीतिक लाभ के लिए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा की गई टिप्पणियां राम मंदिर और धार्मिक आस्थाओं को लेकर विवाद पैदा करती हैं। उन्हें बिना प्रमाण के आरोपों से बचना चाहिए।
भक्त चरणदास महाराज ने उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन की भी प्रशंसा की और कहा कि सरकार के प्रयासों से धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिला है और श्रद्धालुओं की संख्या में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि इसी तरह का मॉडल नासिक और त्र्यंबकेश्वर क्षेत्र में भी लागू किया जाना चाहिए, जहां आगामी कुंभ को देखते हुए विशेष प्राधिकरण और नियम बनाए जा सकते हैं।
उनका मानना है कि धार्मिक जगहों पर शराब, मांस और अन्य आपत्तिजनक गतिविधियों पर नियंत्रण होना चाहिए, ताकि वहां आने वाले श्रद्धालुओं को एक शुद्ध और शांत वातावरण मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के निर्णय केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण हैं।
--आईएएनएस
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