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राज्यसभा से केरल का नाम बदलकर 'केरलम' करने वाला विधेयक पारित

राज्यसभा

नई दिल्ली, 12 अगस्त (आईएएनएस)। राज्यसभा ने बुधवार को केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 को पारित कर दिया। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पर चर्चा का जवाब दिया। इससे पहले लोकसभा भी इस विधेयक को पारित कर चुकी है। नित्यानंद राय ने कहा कि 15वीं केरल विधानसभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का अनुरोध किया था।

उन्होंने कहा कि केरल सरकार का तर्क था कि मलयालम भाषा में राज्य का नाम 'केरलम' है। इसी आधार पर संविधान की पहली अनुसूची में दर्ज राज्य के नाम को बदलने का प्रस्ताव दिया गया। गृह राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके बाद केरल नाम परिवर्तन विधेयक, 2026 को विचार के लिए केरल विधानसभा को भेजा गया। केरल विधानसभा ने विधेयक के सभी खंडों को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।

उन्होंने कहा, ''यह केरल के करोड़ों केरलमवासियों के प्रयास और भावनाओं की सफलता है। यह राज्य सरकार की सोच और उसके संकल्प की भी सफलता है।''

नित्यानंद राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस संकल्प की भी आज पूर्ति हो रही है, जिसके तहत देश की विरासत और संस्कृति से जुड़े गौरव को स्थापित करने और गुलामी के प्रतीकों को हटाने की बात कही गई है। उन्होंने कहा कि विधेयक में प्रावधान किया गया है कि नियत तारीख से राज्य को 'केरलम' के नाम से जाना जाएगा। इसके लिए संविधान की पहली और चौथी अनुसूची में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। उन्होंने इस दौरान पश्चिम बंगाल का नाम बदलने के सुझाव पर भी अपनी बात रखी।

पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की मांग पर नित्यानंद राय ने कहा कि अलग-अलग समय में राज्य का नाम बदलकर 'बंगला', 'बंगाल' और 'बांग्ला' आदि करने के प्रस्ताव सामने आए हैं, लेकिन इनमें एकरूपता नहीं थी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल के सांसद ने अब 'पश्चिम बोंगो' नाम रखने का अनुरोध किया है। यदि पश्चिम बंगाल की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आता है और वह वहां के लोगों की भावनाओं, भारतीय विरासत और संस्कृति से जुड़ा हुआ होगा, तो केंद्र सरकार उस पर निश्चित रूप से विचार कर सकती है।

उन्होंने कहा कि इसी तरह कुछ सदस्यों ने पटना का नाम पाटलिपुत्र करने और कुछ अन्य स्थानों के नाम बदलने के सुझाव दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रस्ताव निर्धारित प्रक्रिया के तहत आने चाहिए। यदि कोई नाम भारत की विरासत, संस्कृति और वहां के लोगों की भावनाओं को दर्शाता है, तो केंद्र सरकार उस पर विचार कर सकती है।

चर्चा के दौरान आदि शंकराचार्य का उल्लेख करते हुए नित्यानंद राय ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति और संस्कार की चर्चा आदि शंकराचार्य के योगदान के बिना पूरी नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि आदि शंकराचार्य ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक एकता को मजबूत करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों में मंदिरों और धार्मिक परंपराओं को व्यवस्थित करने का काम किया।

उन्होंने पुरी और उत्तराखंड के धार्मिक स्थलों का उदाहरण देते हुए कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों के लोगों और परंपराओं को जोड़ने का काम किया गया। नित्यानंद राय ने कहा कि केरल का 'केरलम' होना देश की विरासत, संस्कृति और लोगों की भावनाओं से जुड़ा विषय है और यह सभी भारतवासियों के लिए गर्व का पल है।

--आईएएनएस

जीसीबी/एएमटी