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राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर पर पवन खेड़ा बोले, सवाल पूछने वालों को बनाया जाता है निशाना

राहुल

नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर, सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी और अमेरिका में दिए गए मोहन भागवत के बयान पर कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य पवन खेड़ा ने सरकार पर निशाना साधा।

उत्तराखंड में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने पर कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, " पहले से ही 40-50 मामले हैं, एक और जुड़ जाएगा, इसलिए इसकी चिंता न करें। वे क्या संदेश दे रहे हैं? भारतीय जनता पार्टी इस एफआईआर के जरिए किसे और क्या संदेश दे रही है? यह महत्वपूर्ण है। यह संदेश पूरे शोषित, वंचित और दलित समुदाय के लिए है कि अगर उन्होंने कभी आवाज उठाई है या किसी ने उनके लिए आवाज उठाई है तो आवाज उठाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

यह एफआईआर भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मानसिकता का एक और उदाहरण है। इसलिए एफआईआर की चिंता न करें। हमें इस बात की चिंता होनी चाहिए कि 21वीं सदी में, संविधान से चलने वाले देश का शासन ऐसे लोगों के हाथों में है जो न तो माफी मांग रहे हैं और न ही 'शुद्धिकरण' को लेकर एफआईआर दर्ज कर रहे हैं और न ही प्रधानमंत्री या गृह मंत्री इस पर कुछ बोल रहे हैं, बल्कि 'शुद्धिकरण' के खिलाफ आवाज उठाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।"

सुप्रीम कोर्ट के द्वारा छात्रों को सवाल पूछने से नहीं रोकने वाली टिप्पणी पर कांग्रेस नेता ने कहा, "सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी का हम स्वागत करते हैं। वर्तमान में अगर सरकार से सवाल पूछता है तो उस पर खालिस्तानी और आतंकवादी जैसे आरोप लगा दिए जाते हैं।"

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में कहा था कि भारत की पहचान विविधता में एकता से है और अगर कोई हिंदू यह मानता है कि भारत में मुसलमान नहीं चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह सकता।

भागवत के इस बयान पर पवन खेड़ा ने कहा, "हाथी के दांत खाने के और दिखाने के कुछ और होते हैं। उन्हें देश के अंदर आने दीजिए, फिर हम बात करेंगे। देश के अंदर वे कहते हैं कि इस देश में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है। देश के बाहर वे कहते हैं कि अगर कोई मुसलमानों को रहने नहीं देता तो वह हिंदू नहीं है। ये लोग मानसिक रूप से खोखले हैं। यह विचारधारा नई नहीं है। जब से यह विचारधारा पैदा हुई है, तब से ही उनका मानसिक खोखलापन साफ दिखता रहा है। वे अखंड भारत की बात करते हैं, तो उनसे यह सवाल पूछिए, आज भारत में 14-15 प्रतिशत मुसलमान हैं, अगर अखंड भारत बनता है तो यह संख्या 45 प्रतिशत हो जाएगी। क्या आप उसे बर्दाश्त कर पाएंगे? आप 14-15 प्रतिशत को ही बर्दाश्त नहीं कर पाते और इधर-उधर देखने लगते हैं। उनसे यह सवाल पूछिए। जहां तक मोहन भागवत की बात है, तो उन्हें अभी के लिए छोड़ देते हैं। यह इस देश की बदकिस्मती है कि उन्हें देश पर थोपा गया है।"

--आईएएनएस

ओपी/वीसी