नई दिल्ली, 17 जून (आईएएनएस)। भाजपा सांसद मनन कुमार मिश्रा ने राजस्थान में राहुल गांधी के 'स्टूडेंट्स वॉइस' अभियान, समाजवादी पार्टी में संभावित टूट, शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों को कथित तौर पर भाजपा की ओर से ऑफर दिए जाने के आरोप, उद्धव ठाकरे गुट द्वारा लोकसभा स्पीकर को लिखे गए पत्र और झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों को एकजुट रखने की कोशिशों समेत कई राजनीतिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। इस दौरान उन्होंने विपक्षी गठबंधन पर जमकर निशाना साधा।
राजस्थान में राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए स्टूडेंट्स वॉइस अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस नेता युवाओं को गुमराह करने और देश में भ्रम का माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी का उद्देश्य छात्रों और युवाओं को राजनीति की ओर मोड़कर असंतोष का वातावरण तैयार करना है। मिश्रा ने कहा कि देश के युवा जागरूक और समझदार हैं तथा वे इस तरह के राजनीतिक अभियानों से प्रभावित नहीं होंगे।
उन्होंने कहा कि कोटा जैसे शहरों में लाखों छात्र आईआईटी, मेडिकल और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं। ऐसे छात्रों को राजनीतिक गतिविधियों में शामिल करने का प्रयास उचित नहीं है। भाजपा सांसद ने दावा किया कि राहुल गांधी पहले भी देश और विदेश में ऐसे प्रयास कर चुके हैं, लेकिन उन्हें जनता का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला।
समाजवादी पार्टी में संभावित फूट को लेकर मनन कुमार मिश्रा ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में पार्टी के कई नेता और जनप्रतिनिधि राजनीतिक परिस्थितियों को समझ चुके हैं। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के विधायक और सांसद महसूस कर रहे हैं कि पार्टी का भविष्य कमजोर हो रहा है। मिश्रा ने दावा किया कि आने वाले समय में पार्टी के कई नेता भाजपा और एनडीए के साथ जुड़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि दल-बदल विरोधी कानून (एंटी-डिफेक्शन लॉ) के प्रावधानों के तहत और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए किसी अन्य राजनीतिक दल या गठबंधन में शामिल होना चाहता है, तो उसे रोका नहीं जा सकता।
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत द्वारा लगाए गए उन आरोपों पर भी मिश्रा ने प्रतिक्रिया दी, जिनमें दावा किया गया था कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को भाजपा की ओर से पाला बदलने के लिए आर्थिक प्रस्ताव दिए जा रहे हैं। भाजपा सांसद ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि यदि शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर अलग निर्णय लेना चाहते हैं और कानून के तहत कोई नया समूह बनाना चाहते हैं, तो यह उनका अधिकार है। इस पूरी प्रक्रिया को पैसे या खरीद-फरोख्त से जोड़ना केवल राजनीतिक कमजोरी को छिपाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि संजय राउत अपनी पार्टी में बढ़ती असंतुष्टि को छिपाने के लिए ऐसे बयान दे रहे हैं।
शिवसेना (यूबीटी) की ओर से संभावित फूट को रोकने के लिए लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखे जाने के मुद्दे पर मनन कुमार मिश्रा ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष संविधान और कानून के अनुसार ही निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि यदि किसी दल के सांसद दल-बदल विरोधी कानून के तहत निर्धारित संख्या में हैं और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हैं, तो केवल पत्र लिखकर उस प्रक्रिया को नहीं रोका जा सकता। सांसदों के पास कानून के दायरे में रहकर अलग समूह बनाने, स्वतंत्र रहने या किसी अन्य दल अथवा गठबंधन में शामिल होने का अधिकार है और इस पर अंतिम निर्णय संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही होगा।
झारखंड राज्यसभा चुनाव से पहले विधायकों को एकजुट रखने के लिए इंडिया गठबंधन की ओर से किए जा रहे प्रयासों पर भी मिश्रा ने टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में जनता सत्तारूढ़ गठबंधन से निराश हो चुकी है और इसका असर राजनीतिक दलों के भीतर भी दिखाई दे रहा है। भाजपा सांसद ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) और कांग्रेस के लिए अपने विधायकों को एकजुट रखना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल अपने विधायकों को अलग-अलग स्थानों पर रखकर उन्हें एकजुट रखने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में झारखंड की राजनीति में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं और कई नेता भाजपा और एनडीए की ओर रुख कर सकते हैं।
--आईएएनएस
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