रांची, 10 सितंबर (आईएएनएस)। रांची में बिजली के खंभों से इंटरनेट और केबल तारों का मकड़जाल हटाने के दौरान शहर में इंटरनेट सेवा बाधित होने पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
अदालत ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी इंटरनेट सेवा प्रदाताओं से जवाब तलब किया है कि किस तारीख को, किन इलाकों में और कितने कनेक्शन काटे गए तथा अब तक कितने कनेक्शन बहाल किए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने बाधित सेवाओं को तुरंत बहाल करने और इसकी अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान जेबीवीएनएल (झारखंड विद्युत वितरण निगम लि.) के सीएमडी श्रीनिवासन समेत बीएसएनएल, जियो, एयरटेल और वोडाफोन-आइडिया के वरिष्ठ अधिकारी अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। खंडपीठ ने सभी ऑपरेटरों से इंटरनेट सेवा बाधित होने और बहाली की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।
अदालत ने साफ किया कि तार हटाने की कार्रवाई के कारण आम लोगों की इंटरनेट सेवा अनिश्चितकाल तक बाधित नहीं रह सकती। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि आदेश के 'मिसअंडरस्टैंडिंग' के कारण आम जनता को बेवजह परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सुनवाई के दौरान बीएसएनएल के चीफ जनरल मैनेजर (सीजीएम) विपुल अग्रवाल के रवैये पर अदालत ने कड़ी नाराजगी जताई। हाईकोर्ट के एक अधिकारी का फोन जाने पर अनुचित तरीके से बात करने के मामले में अदालत ने सीजीएम को 14 सितंबर तक लिखित और बिना शर्त माफीनामा दाखिल करने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान बीएसएनएल और जियो की ओर से खंडपीठ को अवगत कराया गया कि हाईकोर्ट की बाधित इंटरनेट लाइन को रिस्टोर कर दिया गया है। इसके अलावा पब्लिक यूटिलिटीज और आम नागरिकों के प्राइवेट इंटरनेट कनेक्शन भी जल्द बहाल करने का आश्वासन दिया गया। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 16 सितंबर की तिथि तय की है।
--आईएएनएस
एसएनसी/एएसएच







