रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

रॉबर्ट वाड्रा से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में 25 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

नई दिल्ली, 4 जुलाई (आईएएनएस)। ब्लैक मनी एक्ट से जुड़े कथित धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में कारोबारी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर शनिवार को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई हुई। मामले की अगली सुनवाई अब 25 जुलाई को होगी।

अगली सुनवाई के दौरान ईडी रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने की अपनी मांग के समर्थन में आगे की दलीलें पेश करेगी।

सुनवाई के दौरान ईडी ने कोर्ट से कहा कि इस मामले में पहले दाखिल की गई मुख्य चार्जशीट पर अदालत पहले ही संज्ञान ले चुकी है। ऐसे में सप्लीमेंट्री चार्जशीट पर संज्ञान लेने के लिए अलग से विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता नहीं है। एजेंसी ने कहा कि अदालत चाहे तो इस चरण में रॉबर्ट वाड्रा को नोटिस जारी कर सकती है।

ईडी ने दलील दी कि कानून के अनुसार अदालत अपराध (ऑफेंस) का संज्ञान लेती है, न कि आरोपी (ऑफेंडर) का। इसलिए मुख्य चार्जशीट पर संज्ञान लिए जाने के बाद सप्लीमेंट्री चार्जशीट भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा मानी जाएगी।

एजेंसी ने कोर्ट को बताया कि उसके पास इस मामले में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इनमें धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किए गए बयान और कई ईमेल एक्सचेंज शामिल हैं। ईडी का दावा है कि इन दस्तावेजों से यह साबित होता है कि लंदन के 12 ब्रायनस्टन स्क्वायर स्थित संपत्ति पर वास्तविक नियंत्रण पूरी तरह रॉबर्ट वाड्रा का था।

ईडी के अनुसार, कंपनियों के मालिकाना हक में बदलाव किए जाने के बावजूद इस संपत्ति का वास्तविक और लाभकारी नियंत्रण रॉबर्ट वाड्रा के पास ही बना रहा। एजेंसी का आरोप है कि अपराध से अर्जित धन को छिपाया गया और उसका इस्तेमाल भी किया गया।

ईडी ने अदालत में यह भी कहा कि ईमेल एक्सचेंज से पता चलता है कि रॉबर्ट वाड्रा की मंजूरी के बिना संपत्ति में एक टाइल तक नहीं बदली जा सकती थी। प्रॉपर्टी के रखरखाव से जुड़ी पूरी जानकारी उन्हें दी जाती थी, बजट की मंजूरी भी उन्हीं से ली जाती थी और रेनोवेशन पर होने वाला खर्च भी वही वहन कर रहे थे।

एजेंसी ने रॉबर्ट वाड्रा के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि वह केवल रेनोवेशन को लेकर सुझाव दे रहे थे। ईडी का कहना है कि यह दावा भ्रामक है, क्योंकि जांच के दौरान मिले दस्तावेजों के अनुसार वह अपने एक सहयोगी के माध्यम से इस काम के लिए धन भी उपलब्ध करा रहे थे।

--आईएएनएस

वीकेयू/एएस