पद्म पुरस्कार पाने से पहले भावुक हुए सम्मानित व्यक्ति, बोले- मेहनत को मिली पहचान

पद्म पुरस्कार पाने से पहले भावुक हुए सम्मानित व्यक्ति, बोले- मेहनत को मिली पहचान

नई दिल्ली, 23 जून (आईएएनएस)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मंगलवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में आयोजित होने वाले 'सिविल इन्वेस्टिचर सेरेमनी-2' से पहले पद्म पुरस्कार से सम्मानित होने वाली कई हस्तियों ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए इस सम्मान के लिए आभार जताया और अपने जीवन के अनुभव साझा किए।

मुंबई में भारतीय फील्ड हॉकी खिलाड़ी और पद्म पुरस्कार विजेता सविता पूनिया ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि बहुत अच्छा लग रहा है। यह अपने आप में एक बड़ा पुरस्कार है। मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरी जर्नी इतनी लंबी रहेगी और मुझे इतना बड़ा पुरस्कार मिलेगा। मेरे लिए, मेरे परिवार और मेरी टीम के लिए यह बहुत बड़ी बात है।

सविता ने अपने संघर्षों को याद करते हुए कहा कि कई बार उन्होंने खेल छोड़ने के बारे में सोचा था, लेकिन परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कई बार मैंने सोचा था कि मुझे खेलना छोड़ना पड़ेगा, लेकिन परिवार की सपोर्ट की वजह से मैंने अपना सफर जारी रखा। एक मिडिल क्लास फैमिली से इस पड़ाव तक पहुंचना काफी अच्छा लगता है। युवाओं के लिए संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि आप जो भी काम करें उसमें डेडिकेशन होना जरूरी है। पेशेंस बहुत जरूरी है, क्योंकि कोई शॉर्टकट नहीं है।

समाज सेवा के क्षेत्र में पद्म पुरस्कार प्राप्त करने वाले सरदार इंदरजीत सिंह सिद्धू ने कहा कि उन्हें पद्म पुरस्कार पाकर बेहद गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि पहले लोग मुझे अलग नजरिए से देखते थे और सवाल उठाते थे कि मैं कचरे के साथ क्यों काम कर रहा हूं, लेकिन अब वे मेरे काम की तारीफ करते हैं और कहते हैं कि आसपास की सफाई करना एक नेक काम है। हर किसी को अपने इलाके में सफाई की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

सिद्धू ने बताया कि उन्हें बचपन से ही गंदगी और कूड़े से परेशानी होती थी। उन्होंने कहा कि परिवार वाले फौजी थे और फौज में साफ-सफाई का बहुत महत्व होता है। 1996 में रिटायर होने के बाद हमने साफ-सफाई पर ध्यान देना शुरू किया। कूड़ा उठाने का काम शुरू किया और लोगों के ताने भी सुनने पड़े, लेकिन हमने परवाह नहीं की। जहां भी गंदगी देखता था, मुझे बुरा लगता था और उसे उठाकर डस्टबिन में डालना शुरू कर देता था। उन्होंने इस सम्मान के लिए सरकार का धन्यवाद भी व्यक्त किया।

मेडिकल क्षेत्र में पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित प्रोफेसर प्रतीक शर्मा ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए गौरव और विनम्रता दोनों का विषय है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान मिलना मेरे लिए सम्मान की बात है। इससे विनम्रता का एहसास होता है, लेकिन साथ ही बहुत उत्साह और खुशी भी होती है कि आपके काम को पहचान मिली है।

प्रोफेसर शर्मा ने बताया कि उनकी रुचि आंत (गट), आंतों में सूजन, गट हेल्थ, बैरेट एसोफैगस और रिफ्लक्स बीमारी यानी सामान्य भाषा में एसिडिटी से जुड़ी रिसर्च में रही है। उन्होंने कहा कि मैंने इन विषयों पर कई किताबें लिखीं और बड़े पैमाने पर शोध किया, जिसके नतीजे कई प्रकाशनों के रूप में सामने आए। उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने भारत सरकार के साथ-साथ गुजरात और आंध्र प्रदेश की सरकारों के साथ भी काम किया है।

अभिनेता सतीश शाह को पद्म श्री से सम्मानित किए जाने पर उनके चचेरे भाई अरविंद ममानिया ने खुशी और गर्व व्यक्त किया। उन्होंने इसे भारतीय सिनेमा और टेलीविजन में सतीश शाह के लंबे और उल्लेखनीय योगदान की उचित पहचान बताया। अरविंद ममानिया ने कहा कि इसे शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है। मुझे पता है कि अगर वह आज यहां होते तो इस सम्मान का भरपूर आनंद लेते और हमने तो शायद उनसे भी ज्यादा खुशी महसूस की है।

उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज हमें खुशी है कि उन्हें यह पुरस्कार मिला, लेकिन अगर वह जीवित होते तो यह खुशी और भी ज्यादा होती। हम उन्हें बहुत याद करते हैं। उनके साथ बिताया गया हर पल यादगार था और साथ गुजारा गया समय कभी भुलाया नहीं जा सकता।

--आईएएनएस

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