पटना की सड़कों पर पसरा हजारों टन कचरा, सफाईकर्मियों की हड़ताल से सफाई व्यवस्था चरमराई

पटना की सड़कों पर पसरा हजारों टन कचरा, सफाईकर्मियों की हड़ताल से सफाई व्यवस्था चरमराई

पटना, 31 जुलाई (आईएएनएस)। पटना नगर निगम (पीएमसी) के कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर राजधानी की सफाई सेवाओं पर बुरी तरह पड़ रहा है। कई इलाकों में घर-घर जाकर कचरा उठाने और सड़कों की रोजाना सफाई का काम रुक गया है।

शुक्रवार सुबह नगर निगम कर्मचारियों के काम बंद करने से सड़कों और मुख्य रास्तों पर हजारों टन कचरा जमा हो गया।

कई जगहों पर कचरे के ढेर लगने की खबर है, जिनमें किदवईपुरी में कवि रमन पथ, इंद्रपुरी में अटल पथ की सर्विस लेन, नवीन किशोर सिन्हा पथ, मीठापुर मेन रोड और राजीव नगर मेन रोड शामिल हैं। हार्डिंग रोड पर भी नगर निगम की कचरा उठाने वाली गाड़ियां खड़ी देखी गईं।

यह हड़ताल 30 जुलाई को राज्यव्यापी आंदोलन के हिस्से के तौर पर शुरू हुई, जिसमें पीएमसी के लगभग 8,000 स्थायी, दिहाड़ी और आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं।

सामान्य हालात में, पटना से हर दिन लगभग 1,200 टन कचरा इकट्ठा किया जाता है, जिसमें करीब 60 प्रतिशत गीला कचरा और 40 प्रतिशत सूखा कचरा होता है। मानसून के दौरान सफाई सेवाओं में रुकावट से लोगों की सेहत को लेकर भी चिंता बढ़ गई है।

पीएमसीएच के सुपरिटेंडेंट डॉ. राजीव कुमार सिंह ने चेतावनी दी है कि बारिश के मौसम में जमा कचरे से मच्छर और मक्खियों का पनपना बढ़ सकता है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

नगर निगम कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति ने तीन मुख्य मांगें रखी हैं, जिनमें दिहाड़ी कर्मचारियों को नियमित करना, आउटसोर्सिंग सिस्टम को खत्म करना और आउटसोर्स कर्मचारियों को नगर निगम में शामिल करना और एसीपी (असिस्टेंट सिटी प्लानर) और एमएसीपी (मॉडिफाइड एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन) के लाभों को बहाल करना शामिल हैं।

अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू करने से पहले कर्मचारी लगभग एक महीने से चरणबद्ध आंदोलन कर रहे थे। 30 जून से 25 जुलाई के बीच विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित किए गए, जबकि 28 जुलाई को शहरी विकास और आवास मंत्री के साथ बातचीत से विवाद का समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद 29 जुलाई को मशाल जुलूस निकाला गया।

यह आंदोलन 23 जून को सफाई कर्मचारियों द्वारा वेतन भुगतान में देरी को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद हुआ है।

--आईएएनएस

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