नई दिल्ली/कोलकाता, 2 जुलाई (आईएएनएस)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला शुक्रवार को कोलकाता में पश्चिम बंगाल विधानसभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, केंद्रीय संसदीय व अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी और अन्य सदस्य उद्घाटन सत्र में हिस्सा लेंगे। पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस स्वागत भाषण देंगे और पश्चिम बंगाल सरकार के संसदीय कार्य मंत्री शंकर घोष धन्यवाद प्रस्ताव पेश करेंगे।
दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम के दौरान विधायी कार्य के प्रमुख आयामों पर केंद्रित तकनीकी सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित की जाएगी। इनमें 'एक प्रभावी विधायक कैसे बनें; सदस्यों के लिए संसदीय परंपराएं, परिपाटी और शिष्टाचार', 'विधानमंडलों में प्रश्नों और अन्य प्रक्रियात्मक साधनों के माध्यम से कार्यपालिका की उत्तरदायित्व सुनिश्चित करना', 'भारतीय संसद की समिति प्रणाली', 'निजी सदस्य विधेयकों सहित विधायी प्रक्रिया', 'संसद में वित्तीय कार्य एवं बजटीय प्रक्रिया', 'संसदीय विशेषाधिकार और आचारनीति' के साथ-साथ 'राष्ट्रीय ई-विधान अनुप्रयोग (नेवा)' विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
इन सत्रों की अध्यक्षता और संबोधन अलग-अलग राज्यों के विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारियों, संसद सदस्यों, संवैधानिक विशेषज्ञों और देशभर के वरिष्ठ संसदीय विशेषज्ञों की ओर से किया जाएगा। इस कार्यक्रम से विचारों और सर्वोत्तम कार्य-पद्धतियों के आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलने के साथ-साथ प्रतिभागियों की विधायी प्रक्रियाओं, संसदीय संस्थाओं व लोकतांत्रिक शासन के संबंध में समझ को और सुदृढ़ किए जाने की अपेक्षा है।
प्रबोधन कार्यक्रम का समापन 4 जुलाई को पश्चिम बंगाल विधानसभा के ऐतिहासिक सदन कक्ष में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि के समापन संबोधन के साथ होगा। इस सत्र को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, हरियाणा के राज्यपाल आशीम कुमार घोष, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश और पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रथींद्र बोस संबोधित करेंगे।
इस कार्यक्रम का आयोजन लोकसभा सचिवालय के पार्लियामेंटरी रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसीज (प्राइड) की ओर से पश्चिम बंगाल विधानसभा के सहयोग से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य नवनिर्वाचित सदस्यों को संसदीय और विधायी कार्यप्रणाली के अलग-अलग पहलुओं, जिनमें समिति प्रणाली, वित्तीय पर्यवेक्षण, संसदीय विशेषाधिकार व विधानमंडलों में डिजिटल पहलों का समावेश है, से परिचित कराना है। यह कार्यक्रम विधायकों, पीठासीन अधिकारियों और संसदीय विशेषज्ञों के बीच संवाद, विचार-विमर्श और अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए भी एक प्रभावी मंच उपलब्ध कराएगा।
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