पश्चिम बंगाल: पहली बार तिरंगा यात्रा का आयोजन, मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

पश्चिम बंगाल: पहली बार तिरंगा यात्रा का आयोजन, मुख्यमंत्री ने किया शुभारंभ

कोलकाता, 7 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल में शुक्रवार को पहली बार 'तिरंगा यात्रा' का आयोजन किया गया। अगस्त के महीने में होने वाले इस कार्यक्रम की शुरुआत कुछ साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी।

लेकिन चूंकि राज्य में पहले तृणमूल कांग्रेस की सरकार थी, इसलिए उस समय विपक्ष ने राज्य में कभी इस कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया।

इस साल की शुरुआत में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और नई राज्य सरकार ने इस महीने 'हर घर तिरंगा' कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया।

शुक्रवार को मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दक्षिण कोलकाता में अलीपुर के सर्वे बिल्डिंग से हाजरा क्रॉसिंग तक एक रैली का नेतृत्व करके इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया।

रैली में शामिल लोगों के हाथों में राष्ट्रीय तिरंगा था। रैली में शामिल अन्य कैबिनेट सदस्यों में राज्य के उद्योग और वाणिज्य मंत्री तापस रॉय और राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन भी शामिल थे।

रैली के समापन भाषण में मुख्यमंत्री ने कहा कि असंख्य प्रतिभागियों के भारी उत्साह से वे अभिभूत हैं।

उन्होंने कहा कि हम 10 अगस्त को मध्य कोलकाता के बिरला तारामंडल से इसी तरह की एक रैली का आयोजन करेंगे। हमें उस दिन 50,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।

उनके अनुसार, यह रैली लोगों में राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना जगाने के लिए आयोजित की गई थी।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इस बार पश्चिम बंगाल में एक राष्ट्रवादी सरकार बनी है। मैं राज्य के सभी लोगों को स्वतंत्रता दिवस की अग्रिम राष्ट्रवादी शुभकामनाएं देता हूं।

आगामी स्वतंत्रता दिवस की वर्षगांठ (15 अगस्त) के अवसर पर मुख्यमंत्री इस अवसर की पूर्व संध्या पर ऑल इंडिया रेडियो के माध्यम से राज्य के लोगों को संबोधित करेंगे।

एक समय पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का रेडियो संबोधन स्वतंत्रता दिवस समारोह का अभिन्न अंग हुआ करता था। 1977 से 2011 तक 34 वर्षों के वाम मोर्चा शासनकाल के दौरान भी मुख्यमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राज्य की जनता को संबोधित करना कभी नहीं छोड़ा।

हालांकि, 2011 से 2026 तक तृणमूल कांग्रेस के 15 वर्षों के शासनकाल में पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हमेशा इससे परहेज किया। इस साल सरकार बदलने के बाद मौजूदा मुख्यमंत्री ने उस पुरानी परंपरा को वापस लाने की पहल की है।

--आईएएनएस

एमएस/