प्रयागराज, 28 जून (आईएएनएस)। भाजपा नेता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों पर तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने अखिलेश यादव पर जाति आधारित राजनीति और तथ्यों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। भाजपा नेता ने कहा कि जिन मुद्दों पर अखिलेश यादव आज भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हीं मामलों में अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान वे प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रहे थे।
पेपर लीक मामले पर अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि किसी भी नेता की विश्वसनीयता उसके कार्यों से तय होती है। अखिलेश यादव को अपने शासनकाल की घटनाओं को याद करने की नसीहत देते हुए उन्होंने कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले उन्हें यह बताना चाहिए कि वर्ष 2014 में हुए यूपी प्री मेडिकल परीक्षा घोटाले और 2015 में यूपी पीसीएस पेपर लीक मामले में उनकी सरकार ने क्या कार्रवाई की थी। दोनों मामलों में एसआईटी का गठन नहीं किया गया, बल्कि केवल हाई लेवल कमेटियां बनाई गईं और उनकी रिपोर्ट का आज तक कोई पता नहीं चला।
सिद्धार्थ नाथ सिंह ने सवाल उठाया कि जब उस समय अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे और पूरा प्रशासन उनके नियंत्रण में था, तब उन्होंने दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्होंने दावा किया कि उन मामलों में समाजवादी पार्टी से जुड़े लोग शामिल थे और लाभ पाने वालों का संबंध एक विशेष बिरादरी से था। यदि अखिलेश यादव अपनी उस समय की गलतियों को स्वीकार करें और सुधार की बात करें तो शायद जनता उनकी बात पर विश्वास कर सकती है।
भाजपा पर 'डोनेशन फर्स्ट' की राजनीति करने को लेकर अखिलेश यादव के आरोप पर सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा कि समाजवादी पार्टी की राजनीति पीडीए तक सीमित है। उन्होंने दावा किया कि पीडीए की राजनीति वास्तव में एक विशेष जाति और वोट बैंक तक सीमित है।
उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी में शीर्ष पदों पर और उसके सांसदों-विधायकों में बड़ी संख्या एक ही समुदाय के लोगों की है, जबकि अन्य पिछड़े वर्गों की अनदेखी की गई है। अल्पसंख्यकों के मुद्दे पर अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यदि वे वास्तव में सभी अल्पसंख्यकों की बात करते हैं तो उन्हें केवल एक समुदाय तक सीमित नहीं रहना चाहिए। समाजवादी पार्टी की राजनीति समाज को जातियों में बांटने वाली है और उसमें सवर्ण समाज को भी अलग-थलग रखने की कोशिश की गई है। जो दल पूरे राष्ट्र और सभी वर्गों की बात करता है, वही 'नेशन फर्स्ट' की बात करने का अधिकार रखता है।
अखिलेश यादव द्वारा भाजपा का नाम बदलने की टिप्पणी पर सिद्धार्थ नाथ सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि नाम बदलने से कुछ नहीं होता। 2014 से समाजवादी पार्टी की साइकिल का टायर फुस्स हो चुका है और अब उसमें हवा भरने वाला कोई नहीं बचा है। पार्टी जिस राजनीतिक ठहराव का सामना कर रही है, उसका इलाज भी अब किसी के पास नहीं है।
वहीं, राम मंदिर चंदा चोरी मामले को लेकर अखिलेश यादव के बयान पर भी भाजपा नेता ने टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी ने एसआईटी जांच की मांग की थी और जब एसआईटी का गठन हो गया तथा कार्रवाई शुरू हुई तो अब उसी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई है और दो लोगों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा भी दिया है। यह पूरा मामला एक ट्रस्ट से जुड़ा हुआ है और कार्रवाई भी ट्रस्ट की शिकायत के आधार पर की जा रही है, न कि सरकार के हस्तक्षेप से। उन्होंने अखिलेश यादव को कानून और जांच प्रक्रिया की जानकारी रखते हुए आरोप लगाने की सलाह देते हुए कहा कि तथ्यों को समझे बिना दिए गए बयान अंततः उन्हीं पर भारी पड़ रहे हैं।
--आईएएनएस
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