प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री सदन में आकर बयान दें : नसीम खान

प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री सदन में आकर बयान दें : नसीम खान

मुंबई, 7 अगस्‍त (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता नसीम खान ने कहा कि कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी के एक ही मांग है कि देश के प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृह मंत्री सदन में आएं और उनके सवालों का जवाब दें। प्रधानमंत्री को अपनी नैतिक जिम्‍मेदारी को स्‍वीकार करनी चाहिए।

संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से बातचीत के दौरान महिला आरक्षण और परिसीमन का समर्थन को लेकर भी बातचीत हुई। इस पर कांग्रेस नेता नसीम खान ने आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि रिजिजू का दोहरा रवैया है। वह अंदर कुछ कहते हैं और मीडिया से बातचीत के दौरान बयान को बदल देते हैं।

उन्‍होंने कहा कि राहुल गांधी और पार्टी अध्‍यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की एक ही मांग है कि देश के प्रधानमंत्री व केंद्रीय गृह मंत्री सदन में आएं और उनके सवालों का जवाब दें। अपनी नैतिक जिम्‍मेदारी को स्‍वीकार करें।

उन्‍होंने सवाल किया कि आखिर ऐसी क्‍या मजबूरी है कि देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सदन में नहीं आ रहे हैं। सरकार को नैतिक जिम्‍मेदारी समझनी होगी।देश के युवा छात्रों पर गोलियां चली, लाठीचार्ज किया गया और छात्राओं के साथ दुर्व्‍यवहार किया गया। इस सारी बातों पर राहुल गांधी चर्चा करने की मांग कर रहे हैं।

कांग्रेस नेता नसीम खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया पर ज्‍यादा सक्रिय रहने पर तीखी टिप्‍पणी की। उन्‍होंने कहा कि सोशल मीडिया ने 2014 में उनकी पार्टी के नेताओं की झूठ की वजह से सत्‍ता में पहुंचाया। पीएम मोदी को लग रहा है कि सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म इंस्‍टाग्राम, फेसबुक या एक्‍स की वजह से सत्‍ता से जाना पड़ेगा। यही कारण है वह इंस्‍टाग्राम अपनाने की कोशिश की है, जिससे युवा छात्रों को प्रभावित कर सकें। लेकिन देश का युवा छात्र पूरी तरह से सरकार से वाकिफ है। इस सरकार की गलत नीतियों को समझ चुका है।

उन्‍होंने पीएम मोदी से सवाल करते हुए कहा कि वह इंस्‍टाग्राम पर जरूर बात करें, लेकिन देश के कई राज्‍यों में बाढ़ आई है, उन राज्‍यों का दौरा क्‍यों नहीं किया। मोदी सरकार झूठ की राजनीति अपना कर देश में राज कर रही है। अब इस तरह की राजनीति नहीं चलने वाली है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जेनजी व जेन अल्‍फा के साथ बातचीत के बाद आरक्षण के लाभ को छोड़ने की बात कही है। इस पर कांग्रेस नेता ने कहा कि पहली बात यह है कि आरएसएस प्रमुख को जेनजी और जेन अल्‍फा से बात करने की जरूरत क्‍यों पड़ी? दरअसल,आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी डरी है।

उन्‍होंने कहा कि सरकार ने गलत निर्णय लेकर योग्‍य छात्रों, जेनजी और जेन अल्‍फा का भविष्‍य खतरे में डालने का काम किया। इसको लेकर नौजवानों में आक्रोश है और देश के कई राज्‍यों में लोग सड़कों पर उतरे। छात्रों के आंदोलन की वजह से सरकार को झुकना पड़ा।

उन्‍होंने कहा कि अब केंद्र सरकार को डर लग रहा है कि देश के 34-35 करोड़ जेनजी और जेन अल्‍फा साल 2029 के चुनाव में मतदाता होंगे,जिससे केंद्र को अपनी जमीन खिसकते हुए दिखाई दे रही है।

--आईएएनएस

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